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गीता के माता-पिता की सोशल मीडिया से तलाश

October 28th, 2019 09:12 IST
गीता के माता-पिता की सोशल मीडिया से तलाश

हाईलाइट

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डिजिटल डेस्क,इंदौर। पाकिस्तान से लाई गई मूक बधिर गीता को तमाम कोशिशों और कई लोगों के दावों के बाद भी अब तक अपना परिवार नहीं मिल पाया है। गीता के परिवार को खोजने के लिए अब सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। फेसबुक पर जहां एक विशेष पेज बनाया गया है, वहीं मोबाइल एप्लीकेशन फेस एप की भी मदद ली जा रही है।

भारत की बेटी गीता के पाकिस्तान में होने की बात सामने आने पर लगभग चार साल पहले तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की कोशिशों के चलते उसे अपने देश लाया जा सका था। बाद में गीता को इंदौर के मूक बधिर संस्थान में रखा गया था, उसे यहां तब तक के लिए लाया गया था, जब तक उसके माता-पिता नहीं मिल जाते। बीते चार साल में हुई तमाम कोशिशें असफल रही हैं। यही कारण है कि गीता 26 अक्टूबर, 2015 से इंदौर में ही है।

गीता के माता-पिता होने का कई लोगों ने दावा किया, मगर सफलता नहीं मिली। यही कारण है कि मूक बधिर बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था आनंद सर्विस सोसायटी ने फेसबुक पर एक पेज रीयूनाइट गीता ए डेफ गर्ल विथ फैमिली के नाम से तैयार किया है। संस्था के ज्ञानेंद्र पुरोहित बताते हैं कि इसके साथ ही फेस एप का भी गीता के परिजनों को खोजने के लिए सहारा लिया जा रहा है। पुरोहित ने आईएएनएस को बताया कि फेस एप ऐसा मोबाइल एप्लीकेशन है, जिसके जरिए किसी भी व्यक्ति की दस साल पुरानी तस्वीर को तैयार किया जा सकता है, गीता की भी इसी तरह की तस्वीरें तैयार कर वायरल की गई हैं, जिससे उम्मीद है कि उसके माता-पिता का पता चल जाएगा।

उन्होंने आगे बताया कि चीन और रूस में इस फेस एप के जरिए गुम बच्चों को खोजने में मदद मिली है। चीन में 18 साल पहले गुम हुए बच्चे को खोजने की बात सामने आई, तीन साल की उम्र में गुम हुए बच्चे की तस्वीर तैयार कर वायरल की गई और उसके माता-पिता को खोज निकाला गया। इसी के चलते इस एप के जरिए गीता के माता-पिता को खोजने की कोशिश की जा रही है।

गीता ने अपने को लगभग 10 साल पहले लापता होने की बात कही है, वर्तमान में वह 27 साल की है, लिहाजा 10 पहले की उसकी तस्वीर तैयार कर वायरल की जा रही है। फेस एप ऑफीशियल इंटेलीजेंस का हिस्सा है। गौरतलब है कि गीता के माता-पिता के तौर पर 24 से अधिक लोग दावा कर चुके हैं, इनमें से कई का तो डीएनए टेस्ट भी करवाया गया था। मगर किसी का भी डीएनए गीता के डीएनए से मेल नहीं खाया। गीता न तो बोल सकती है और न ही सुन सकती है। वह बीते चार साल से इंदौर के मूक बधिर संस्थान में है। वर्तमान में वह स्कूली शिक्षा के साथ कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण ले रही है।

उम्मीद जताई जा रही है कि गीता के माता-पिता को खोजने के लिए शुरू की गई मुहिम रंग लाएगी, क्योंकि गीता की 10 साल पुरानी तस्वीर तैयार कर उसे वायरल किया जा रहा है, ताकि उसे जानने वाले लोग आसानी से पहचान सकेंगे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।