दैनिक भास्कर हिंदी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग ने किया अमल, जाति वैधता प्रमाण पत्र न जमा करने वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता खत्म करने का मामला 

September 9th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  राज्य चुनाव आयोग ने जाति वैधता प्रमाणपत्र न पेश करने वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता रद्द करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल शुरु कर दिया है। आयोग ने सभी विभागीय आयुक्तों को पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करने को कहा है।  इससे राज्य में स्थानीय निकायों के करीब 9 हजार सदस्यों पर खतरे की तलवार लटक रही है। बीते 23 अगस्त को इस बाबत सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था। 7 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग ने सभी विभागीय आयुक्तों को पत्र भेज कर कहा है कि तय समय सीमा के भीतर जाति वैधता प्रमाणपत्र न पेश करने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की जाए।

मंत्रिमंडल की बैठक में आने वाला है प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों को अपने पद गंवाने पड़ेंगे। ऐसी स्थिति में उपचुनाव की नौबत आ जाएगी। इसलिए आरक्षित सीटों से चुनकर आए जनप्रतिनिधियों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार जाति वैधता प्रमाण पत्र पेश करने की समय सीमा बढ़ाना चाहती है। सूत्रों के अनुसार इस बाबत राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में प्रस्ताव रखा जा सकता है।

क्या है मामला
चुनाव जीत कर आने के 6 माह के भीतर जाति वैधता प्रमाण पत्र न पेश करने वाले कोल्हापुर महानगरपालिका के 19 नगरसेवकों की सदस्यता रद्द करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राज्य की अन्य महानगरपालिका, नगरपालिका, नगर परिषद, जिला परिषद व पंचायत समितियों में आरक्षित सीटों से चुन कर आए जनप्रतिनिधियों पर भी खतरे की तलवार लटक रही है।

यह है नियम
नियमों के अनुसार आरक्षित सीटों पर चुनकर आने वाले जनप्रतिनिधियों को चुनाव के 6 माह के भीतर जाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है, लेकिन राज्य में स्थानीय निकायों के करीब 9 हजार जनप्रतिनिधियों ने 6 माह की अवधि बीत जाने के बाद भी जाति वैधता प्रमाण पत्र पेश नहीं किया है।