अनदेखी: नागपुर में 10 वर्ष से औद्योगिक इकाइयों का नहीं हुआ सर्वे

July 29th, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर। महाराष्ट्र में लघु-मध्यम व बड़े उद्योगों को विकसित करने के लिए राज्य व केंद्र सरकार द्वारा कई तरह की योजनाएं शुरू की गई हैं। जिला उद्योग केंद्र के जरिए इन औद्योगिक इकाइयों को पोषित करने व आवश्यकता के अनुरूप सहयाेग करने का दावा किया जाता रहा है। विशेष उद्योगों को संचालित करने पर निवेश की गई रकम की 70 से 80 फीसदी राशि सब्सिडी के रूप में दी जाती है। कितनी औद्योगिक इकाइयां शुरू हैं व कितनी बंद हैं, इसका ब्योरा जिला उद्योग केंद्र के पास नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले 10 वर्ष से औद्योगिक इकाइयों का सर्वे नहीं होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। 10 वर्षों में कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं, लेकिन प्रत्यक्ष सर्वे नहीं होने से रिकॉर्ड में इनका अस्तित्व बरकरार है। इस तरह बंद औद्योगिक इकाइयों को सरकारी सुविधाओं का लाभ अब भी प्रदान किया जा रहा है, जिसकी वजह से राज्य व केंद्र शासन को भारी नुकसान हो रहा है।

आवश्यकता पड़ने पर करते हैं सर्वे
जिला उद्योग केंद्र द्वारा विभाग की चुनिंदा इकाइयों का सर्वे कर उनकी औद्योगिक गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जाता है। यह सर्वे तब होता है, जब प्रशासनिक स्तर पर इसकी आवश्यकता पड़ती है। एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कुछ चुनिंदा औद्योगिक क्षेत्र का सर्वे कर यह पता लगाने का भी प्रयास किया जाता है कि संबंधित क्षेत्र में कितनी इकाइयां शुरू हैं। कुछ बंद इकाइयों का पता लगाने के लिए भी कभी-कभी सर्वे की आवश्यकता महसूस होती है। 

केंद्र सरकार की है जिम्मेदारी
पिछले 10 वर्ष से विभाग में औद्योगिक सर्वे नहीं हुआ है, जिसकी वजह से यह बता पाना मुश्किल है कि विभाग में कितनी औद्योगिक इकाइयां शुरू अथवा बंद हैं। इस तरह के सर्वे की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है। गजेंद्र भारती, उद्योग सह-संचालक, नागपुर विभाग

इकाइयों की संख्या बताना मुश्किल
नागपुर विभाग अंतर्गत आैद्योगिक सर्वेक्षण नहीं होने से वर्तमान में शुरू औद्योगिक इकाइयों की संख्या बता पाना बेहद मुश्किल है। औद्योगिक इकाइयां शुरू होने अथवा बंद होने संबंधी ब्योरा जिला उद्योग केंद्र के पास ही रहता है।  विशाल अग्रवाल, अध्यक्ष, विदर्भ इंडस्ट्री एसोसिएशन

तैयार की जा रही डायरेक्टरी
सांख्यिकी विभाग द्वारा सभी औद्यौगिक इकाइयों का ब्योरा इकट्ठा किया जाता है। सांख्यिकी विभाग हर साल सर्वे करता है। इसके अलावा एमआईए द्वारा एक डायरेक्टरी तैयार की जा रही है, जिसमें सभी औद्योगिक इकाइयों का ब्योरा प्रकाशित होगा। आगामी कुछ दिनों में यह डायरेक्टरी उपलब्ध होगी।
-चंद्रशेखर शेगांवकर, अध्यक्ष, एमआईडीसी इंडस्ट्री एसोसिएशन