दैनिक भास्कर हिंदी: सेव वाइल्ड एनिमल्स... ताड़ोबा अंधारी में ‘तार’ हटाने जुटी 9 टीम

April 24th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। ताड़ोबा अंधारी टाइगर रिजर्व में उन मार्गों अथवा जल स्रोतों के आस-पास लगे फैंसिंग (तार) को हटाने की मुहिम वन विभाग ने छेड़ी है, जहां से होकर वन्यजीव गुजरते हैं। नौ टीमों को काम पर लगाया गया है। 

घटना ने खींचा ध्यान
गत 12 अप्रैल को रिजर्व के खाटोड़ा क्षेत्र में एक बाघिन की तार में फंसने के कारण मौत हो गई थी। शिकारियों द्वारा जानवरों को फंसाने के लिए लगाए तार में फंसकर बाघिन की मौत से रिजर्व में शिकारियों की गतिविधियां जारी रहने का भी खुलासा हुआ। बाघिन की मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पास से वन्यजीवों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तार और जाल भी बरामद हुए थे। 

हर टीम में 8 गार्ड
इसके बाद वन विभाग की ओर से रिजर्व में बड़े स्तर पर तार व जाल हटाने की मुहिम शुरू की गई है। इस मुहिम में नौ टीमें लगी हैं और हर टीम में आठ गार्ड काम कर रहे हैं। इसके पहले इस काम को तीन टीमें कर रही थीं। बाघिन की मौत के बाद टीम को बढ़ा दिया गया है। मुख्य रूप से ताड़ोबा, माहुर्ली और कोलसा में तार हटाने का काम जारी है। वन विभाग का दावा है कि आने वाले सप्ताह तक रिजर्व के सभी मैदानों, जल स्रोतों और मार्गों को तार व जाल से मुक्त करा लिया जाएगा।

स्थानीय लोगों पर तार लगाने का आरोप
रिजर्व के आस-पास स्थित गांव के लोगों पर जानवरों को फंसाने के लिए तार लगाने के आरोप लगते रहे हैं। इस तरह का पहला मामला 2010 में सामने आया था, जब खोसला रेंज में तार में फंसने से एक बाघ की मौत हो गई थी। दो स्थानीय लोगों को वन्यजीव के अंगों के अवैध व्यापार के मामले में पकड़ा भी गया था। अब तार में फंसने से बाघिन की मौत से साबित हो गया कि स्थानीय लोग वन्यजीवों को मांस के लिए मारते हैं। मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पास से जानवरों को फंसाने और उन्हें काटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शस्त्र बरामद हुए हैं। 

इसलिए लगाते हैं तार
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी के बाद आसपास के गांव के लोग सतर्क हो गए हैं। आमतौर पर वन्यजीवों को पकड़ने के लिए रात में तार लगाए जाते हैं और सुबह फंसे जानवर को निकाल कर छुपा दिया जाता है। इस बार बाघिन के फंसने के कारण मामला सामने आ गया।  सात वर्ष में शिकारियों के कारण महाराष्ट्र में 159 बाघ व तेंदुओं की मौत

सबसे अधिक बाघों की मौत
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सर्वे ऑफ इंडिया (डब्ल्यूचीएसआई) की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में वर्ष 2010 से 2017 के बीच शिकार संबंधी गतिविधियों के कारण 159 बाघ और तेंदुओं की मौत हुई थी। इनमें 134 तेंदुए और 25 बाघ थे। राज्य में फिलहाल 291 तेंदुए और 84 बाघ हैं। पिछले दो वर्षों में 46 तेंदुओं की मौत हुई है। वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा 16 बाघों की मौत हुई थी।