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चीन में आर्टिफिशियल चांद बना रहे नागपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर

December 26th, 2018 12:48 IST
चीन में आर्टिफिशियल चांद बना रहे नागपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भारत के टैलेंट हमेशा ही विदेश में सफलता के झंडे गाड़ते रहे हैं।  इन दिनों चीन के  आर्टिफिशियल चांद और हांगकांग स्मार्ट सिटी परियोजना में नागपुर की प्रतिभाएं भी खम ठोंक रही हैं। शहर के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की टीम दोनों ही परियोजनाओं में क्लाउड सोल्यूशन के क्षेत्र में सहयोग कर रही हैं। चीन के महत्वाकांक्षी  आर्टिफिशियल मून प्रोजेक्ट चांद की चमक के प्रबंधन के लिए साॅफ्टवेयर विकसित करने की जिम्मेदारी सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत मिश्रा व उनकी टीम उठा रही है। इस मिशन पर काम कर रही चीन की कंपनी हुवेई के साथ काम करने वाली यह एकमात्र भारतीय समूह है। इसके पूर्व चीन के अलीबाबा समूह के लिए भी टीम काम कर चुकी है। हांगकांग में डबल सिटीजनशिप के कारण आने वाली समस्याओं के निराकरण के साथ-साथ स्मार्ट सिटी से जुड़ी स्मार्ट लैंप परियोजना पर यह टीम काम कर रही है। दोनों प्रोजेक्ट पर काम कर रही टीम में कुल 83 सदस्य हैं।

चीन के चेंगडू में लगेगा यह  आर्टिफिशियल चांद
आर्टिफिशियल  चांद वास्तव में रोशनी का कृत्रिम स्रोत है, जो वास्तविक चांद से आठ गुना अधिक रोशनी प्रदान करेगा। इसे वर्ष 2020 में दक्षिण चीन के सिचुआन प्रांत के शेंगडू शहर में लगाया जाना है। इसमें लगे सोलर पैनल दिन में सौर ऊर्जा का निर्माण करेंगे, जिसकी रोशनी से रात में मानव निर्मित चांद चमकेगा। इसके प्रकाश के कारण 15 लाख आबादी वाले इस शहर को रात में स्ट्रीट लाइट की जरूरत नहीं होगी। इससे इस मद पर खर्च होने वाली की बचत होगी।  -प्रशांत मिश्रा, टीम प्रमुख 

नागपुर में  प्रोजेक्ट साकार हो तो एक हजार कराेड़ की वार्षिक बचत होगी

परियोजना की जिम्मेदारी के कारण मून गर्ल कहलाने वाली व परियोजना की प्रमुख रूपल शिरपुरकर का कहना है कि अगर हम नागपुर में ऐसे चांद की बात करें तो इससे शहर के स्ट्रीट लाइट के मद पर वार्षिक एक हजार कराेड़ रुपए की बचत संभव है। रूपल ने नागपुर के केडीके कॉलेज से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री ली है।

क्या है क्लाउड सोल्यूशन 
क्लाउड सोल्यूशन इंटरनेट की सहायता से कंप्यूटर नेटवर्क, स्टोरेज, एप्लिकेशन और रिसोर्सेज तक पहुंच का माध्यम प्रदान करती है। क्लाउड संबंधी सेवा प्रदाता मांग पर ये सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इससे कंपनी की क्षमता, मापनीयता और कार्यात्मकता बढ़ जाती है और रख-रखाव और कंप्यूटर संबंधी आधारभूत संरचना की लागत कम हो जाती है। इससे कंपनियां अपने मूल कार्य पर अधिक ध्यान दे पाती हैं। 

स्मार्ट लैंप, कई सेवाएं देगा एक साथ
प्रशांत मिश्रा ने बताया कि उनकी टीम हांगकांग में स्मार्ट सिटी परियोजना पर भी काम कर रही है। यहां वे दो तरह की सेवा पर काम कर रहे हैं। पहला- हांगकांग के लोगों के पास दो पहचान-पत्र होने के कारण होने वाली परेशानियों के हल के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करना और दूसरा स्मार्ट सिटी में लग रहे स्मार्ट लैंप पर। स्मार्ट लैंप रोशनी देने के साथ-साथ कई और सेवाओं के केंद्र होंगे। ये कचरापेटियों से संबंधित सूचनाएं, सड़क व परिवहन से संबंधित जानकारी भी लोगों को प्रदान करेंगे। 

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