दैनिक भास्कर हिंदी: दो साल का बांड, ट्रेनिंग के नाम पर लाखों ऐंठे, नहीं सुनी गुहार तो थाने का किया घेराव

December 11th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। उच्च शिक्षित युवाओं को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलने वाली कंपनी के खिलाफ थाने में शिकायत दी गई। पुलिस द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने पर बेरोजगारों युवाओं ने थाने का घेराव किया। एक कंपनी द्वारा शहर के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है।  सैकड़ों युवा सीताबर्डी थाने में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। शिकायत दर्ज नहीं करने पर उन्होंने थाने का घेराव किया। ठगी के शिकार हुए इन युवाओं ने सीताबर्डी के वरिष्ठ थानेदार हेमंत खराबे से मुलाकात कर उन्हें लिखित शिकायत दी। 

शिकायत में यह
शिकायत में उन्होंने कबीर इंफोटेक नाम के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशिक बंसोड और उनसे जुड़कर कार्य करने वाले प्रशांत बोरकर, अशिल शेख, निशांत नखाते, नोमा खान व मोना यादव के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की गुजारिश की है। हेमंत खराबे ने पीड़ितों को आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई करेंगे। इस मामले की शिकायत जिलाधीश कार्यालय में भी की गई है। पीड़ितों में लोकेश फुलारिया, सचिन पराते, राहुल माहुल, नीलेश झोटिंग, दीपेश कडवे, वेदप्रकाश बुधे, आतिक अली व अन्य 150 युवक शामिल हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशिक बंसोड से इस मामले में उनके मोबाइल पर दैनिक भास्कर ने संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उनका मोबाइल स्वीच आॅफ था। इधर, कंपनी का मुख्य कार्यालय बंद देखकर पीड़ित थाने पहुंच गए। 

करते थे दो साल का बांड
पीड़ित लोकेश फुलारिया और अन्य ने बताया कि कबीर इंफोटेक कंपनी ज्यादातर इंजीनियर छात्रों को अपना निशाना बनाती थी। इस कंपनी का मुख्य कार्यालय इम्पीरियल प्लाजा सीताबर्डी में है। इन बेरोजगार युवाओं ने कंपनी के मुख्य कार्यालय से संपर्क किया। प्रशिक्षण देने के नाम पर किसी से 10, किसी से 20, किसी से 25, किसी से 70, किसी से 80 और किसी-किसी से तो डेढ़ लाख रुपए लिए गए। कंपनी ने रविनगर में ट्रेनिंग सेंटर कोपा कैफे की इमारत की पांचवीं मंजिल पर  खोल रखा है। कंपनी ने इन युवाओं को बताया कि उन्होंने हिंगना में नई कंपनी खोली है। वहां पर सॉफ्टेवयर क्षेत्र में नौकरी दी जाएगी। इन युवाओं ने कबीर इंफोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर व उनसे जुड़े उक्त लोगों से मुलाकात की। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद 20 हजार रुपए माह पर नौकरी देने का वादा किया गया। साथ ही कहा कि दो साल का बांड भी लिखकर लिया जाएगा। उसी समय प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। प्रशिक्षण लेने के लिए सोचने का समय तक दिया जाता था, पर यह बस छलावा था, ताकि विश्वास हो जाए कि कंपनी सोचने का मौका भी दे रही है।