दैनिक भास्कर हिंदी: चौहरे हत्याकांड में तीनों आरोपियों को दोहरी फांसी

November 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, अकोला। चार साल पूर्व चार लोगों की हत्या के मामले में जिला न्यायालय ने तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। गौरतलब हो कि उरल पुलिस थानांतर्गत आने वाले ग्राम बाखराबाद के पुलिस पाटील दत्ताराम विश्वनाथ माली ने 14  अप्रैल 2014 को शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था भगवंतराव माली ने आरोपी गजानन माली के साथ दो एकड़ जमीन खरीद फरोख्त का व्यवहार किया था। लेकिन गजानन ने खरीदी देने से इंकार कर दिया था। जिससे भगवंतराव माली ने दीवानी न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने शिकायतकर्ता को  पुलिस बंदोबस्त में जमीन का कब्जा देने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद गजानन माली ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। जिसकी शिकायत उन्होंने उरल पुलिस थाने में दर्ज कराई थी ।

गुस्साए गजानन माली , नंदेश माली व दीपक माली,ने धारदार शस्त्र से पहले खेत में काम कर रहे योगेश माली तथा वनमाला रोकडे की हत्या कर दी थी। जिसके बाद आरोपियों ने मृतक के  घर जाकर राजेश माली तथा विश्वनाथ माली की हत्या कर दी। इस नृशंस हत्याकांड के बाद उरल पुलिस ने गजानन माली, नंदेश माली व दीपक माली के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दोषारोप पत्र तैयार कर न्यायालय में पेश किया। तृतीय जिला व सत्र न्यायाधीश वी.डी केदार के न्यायालय में इस अभियोग की सुनवाई हुई ।  सरकारी पक्ष की ओर से 8 गवाहों के  न्यायालय में बयान दर्ज कराए।  दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों  को धारा 302 में फांसी , 120  बी में फांसी के साथ प्रत्येक आरोपियों को 10 हजार रूपए जुर्माना अदा करने के आदेश दिए । जुर्माने की राशि का भुगतान न करने पर 1 साल की सजा , धारा 450.34   में 7  साल की सजा व प्रत्येक को 5 हजार रूपए जुर्माना अदा करने के आदेश दिए , जुर्माने का भुगतान न करने पर दो साल की सजा भुगतनी होगी तथा आरोपियों को आर्म एक्ट की धाराओं में रिहा कर दिया । सरकार पक्ष की ओर अधिवक्ता आर.आर देशपांडे ने पैरवी की । 

किए थे गंभीर वार
आरोपियों में मृतक को लेकर इतना गुस्सा था कि मरने के बाद भी वह आरोपी पर वार करते रहे । आरोपियों ने मृतक वनमाला माली पर 10, योगेश माली पर 22 , विश्वनाथ माली पर 4 , राजेश माली पर 16 वार किए थे ।

दया याचिका ठुकराई
न्यायालय  द्वारा आरोपियों को दोषी पाए जाने की जानकारी देने पर आरोपियों ने तथा उनके अधिवक्ताओं ने दया याचिका दायर की । इस याचिका पर सुनवाई करते न्यायधीश ने कहा कि खेत में दो आरोपियों की हत्या करने के बाद आप लोग उनके घर जाकर दो हत्याएं और की थी इन हत्याकांड के दौरान आपको सोचने का काफी समय मिला था ।  लेकिन आपने किसी प्रकार का विचार नहीं किया जिससे यह स्पष्ट है कि आप माली परिवार को खत्म करने की निर्णय कर चुके थे । यह हत्याकांड काफी सोच विचार के बाद अंजाम दिया गया था जिससे आप लोग दया के पात्र नहीं हैं यह कहते हुए न्यायाधीश ने दया याचिका ठुकरा दी। 

सजा से पीड़ित परिवार को न्याय मिला
माली परिवार की बेरहमी से हत्या के बाद न्यायालय ने तीन आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है । उससे उन अपराधियों को यह संदेश जाता है कि अपराध के बाद देर से ही सही उन्हें उनके कुकर्मों की सजा मिलती है । वहीं  न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले से मृतक के परिवार को न्याय मिला है। - आर.आर. देशपांडे जिला सरकारी अधिवक्ता