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नागपुर : मनपा स्थायी समिति के नए सभापति पद पर नजर

नागपुर : मनपा स्थायी समिति के नए सभापति पद पर नजर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मनपा सत्तापक्ष में बारी-बारी से किए जा रहे बदलावों के बाद अब सबकी नजरें मनपा स्थायी समिति के नए सभापति पद पर है। 5 मार्च से पहले इसके चुनाव होने हैं। चुनावी वर्ष होने से भाजपा भी फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इसके जरिये भाजपा सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश में है। महापौर पद खुले वर्ग को और उपमहापौर-सत्तापक्ष नेता पद ओबीसी वर्ग को देने के बाद अब अन्य समाज पर पार्टी की नजर है। सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाते हुए यह पद इस बार दलित-वंचित वर्ग को मिलने के संकेत हैं।

फूंक-फूंक कर कदम
सत्तापक्ष नेता पद से संदीप जाधव का इस्तीफा लेने के बाद पार्टी भी इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती है। ऐसे में मनपा तिजोरी की कमान यानी स्थायी समिति सभापति पद पर किसी वंचित वर्ग के चेहरे को बैठाए जाने की चर्चा है। महिला वर्ग से भी नाम चर्चा में है, लेकिन राज्य में विरोधी पार्टी की सरकार होने से और आर्थिक मामलों को लेकर आयुक्त से चल रहे मतभेदों के कारण पार्टी को इस पद पर जुझारू चेहरे की आवश्यकता महसूस हो रही है। हालांकि इस पर कोई खुलकर कुछ नहीं बोल पा रहा है। अमूमन किसी भी पद पर समय से पहले आधिकारिक तौर पर घोषित किए जाने वाले नाम पर पार्टी इस बार चुप्पी साधे हुए है। लेकिन चुनावी वर्ष और सभी समुदायों में समन्वय साधने की दृष्टि से पार्टी सभी से फीड बैक ले रही है। 

 रणनीति के तहत निर्णय  
आगामी 2022 में मनपा के आम चुनाव होने हैं। इसके लिए अभी से बिसात बिछनी शुरू हुई है। 
सभी वरिष्ठों को मौका देने के लिहाज से पहले संदीप जोशी और मनीषा कोठे को महापौर-उपमहापौर दिया गया। 
तय शर्त के अनुसार, सवा साल में इस्तीफा लेकर दयाशंकर तिवारी और मनीषा धावड़े को मौका दिया गया। 
संदीप जाधव ने सत्तापक्ष नेता पद से इस्तीफा दिया। वरिष्ठ नगरसेवक अविनाश ठाकरे को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजनीतिक गुणा-भाग जारी 
अब स्थायी समिति सभापति का कार्यकाल भी 5 मार्च को खत्म होने जा रहा है। इससे पहले समिति के चुनाव कराने हैं। संदीप जाधव के इस्तीफे से अब स्थायी समिति सभापति के लिए नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। हालांकि इसके लिए अनेक लोग जुगाड़ में लगे हैं। पश्चिम नागपुर से एक वरिष्ठ नगरसेवक, पूर्व से एक वरिष्ठ नगरसेविका का नाम भी चर्चा में है। अंतिम मौके की तर्ज पर सभी अपने-अपने प्रयास में लगे हैं। पार्टी इस गुणा-भाग में जुटी है कि किसका असर ज्यादा होगा। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।