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इमरजेंसी ब्रेक से घायल हुआ व्यक्ति मुआवजे का पात्र -  हाईकोर्ट ने दिये 90 हजार रुपए देने का आदेश 

इमरजेंसी ब्रेक से घायल हुआ व्यक्ति मुआवजे का पात्र -  हाईकोर्ट ने दिये 90 हजार रुपए देने का आदेश 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। आटो रिक्शा ड्राइवर द्वारा सही समय पर ब्रेक न लगाने के चलते चोटिल होनेवाला व्यक्ति भी मुआवजे मांग सकता है। बांबे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में यह बात स्पष्ट की है। महानगर निवासी मोहम्मद वसीम शेख  11 जुलाई 2004 को मालवणी से बांद्रा से जा रहे थे। इस दौरान आटोरिक्शा ड्राइवर ने सही समय पर ब्रेक नहीं लगाया जिससे आटोरिक्शा सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। इस दौरान शेख चोटिल हो गए। इस वजह से वह अपने काम पर भी कई दिनों तक नहीं जा सके।   इस घटना के बाद शेख ने मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में मुआवजे के लिए दावा दायर किया। ट्रिब्यूनल ने आटोरिक्शा मालिक व बीमा कंपनी न्यू इंडिया इश्योरेंस कंपनी को मिलकर सड़क दुर्घटना के चलते चोटिल हुए शेख को 90 हजार रुपए 9.25 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का फैसला सुनाया। ट्रिब्युनल के इस फैसले को बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।  

न्यायमूर्ति आरडी धानुका के सामने अपील पर सुनवाई हुई। इस दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना का शिकार होनेवाला आटोरिक्शा दुर्घटना के दिन बीमाकृत नहीं  था। इसके अलावा बीमा के जो दस्तावेज पीड़ित(शेख) ने पेश किए है वे अधूरे है व अस्पष्ट है। बीमा पालिसी में आटोरिक्शा के मालिक का नाम ही नहीं है। जबकि दुर्घटना का शिकार होनेवाले शेख  ने आरटीओं कार्यालय से आटोरिक्शा के बीमा का प्रमाणपत्र पेश किया। जिसमें दुर्घटना ग्रस्त आटोरिक्शा का नंबर,इंजिन क्रमांक व चेचिस क्रमांक की जानकारी दी हुई थी। यहीं नहीं शेख ने ट्रिब्युनल में आरटीओ के क्लर्क को भी गवाह के रुप में पेश किया। अपनी चोट की पुष्टि को लेकर भी शेख ने दस्तावेज भी पेश किए। मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति ने ट्रिब्युनल के आदेश को न्यायसंगत पाया। न्यायमूर्ति ने कहा कि हमे ट्रिब्युनल के आदेश में कोई खामी नजर नहीं आती है। यह कहते हुए न्यायमूर्ति ने ट्रिब्युनल के आदेश के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया। 

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