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कोविड-19 : प्लाज्मा थेरेपी ट्रायल की तैयारी, खून फिर से डोनर के शरीर में चला जाएगा

कोविड-19 : प्लाज्मा थेरेपी ट्रायल की तैयारी, खून फिर से डोनर के शरीर में चला जाएगा

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी के स्थायी इलाज को लेकर शासकीय वैद्यकीय अस्पताल और महाविद्यालय (मेडिकल) में भी प्रयास शुरू हो गए हैं। यहां प्लाज्मा थेरेपी ट्रायल की तैयारी चल रही है। इसके लिए अत्याधुनिक मशीन मंगाई जा रही है। मेडिकल के प्लाज्मा प्रोजेक्ट से जुड़े चिकित्सकों ने दावा किया कि इस मशीन के माध्यम से शरीर से प्लाज्मा अलग करना आसान होगा। खास बात यह है कि प्लाज्मा अलग होकर खून डोनर (रक्तदाता) के शरीर में चला जाएगा। ऐसे रक्तदाताओं की बाकायदा सूची भी तैयार हो गई है।

50  फीसदी का जवाब सकारात्मक 
पूरे महाराष्ट्र से 2 हजार ऐसे लोग इसमें शामिल हैं। इस सूची में ऐसे लोगों का नाम शामिल किया गया है, जो कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं और प्लाज्मा प्रक्रिया के लिए पूरी तरह से योग्य हैं।  उनकी मानसिक स्थिति जानने के लिए कुछ डोनर को फोन भी किया गया। इसमें 50 प्रतिशत डोनर का जवाब सकारात्मक रहा। इस विषय पर मरीजों ने कई सवाल भी पूछे। अब भी कई मरीजों को बीमार होने का डर सता रहा है। कुछ मरीजों ने इसके लिए मना भी किया था।

 योग्य होना चाहिए डोनर
प्लाज्मा देने वाले डोनर को चुनने से पहले कई तरह के नियमों का ध्यान रखना पड़ता है। मरीज का वजन 50 किलाे ग्राम से  ज्यादा होना चाहिए। जब वह संक्रमित हुआ, तब उसमें बीमारी के कुछ लक्षण होना भी जरूरी है। यदि उसे एक दिन के लिए भी बुखार, खांसी या अन्य लक्षण दिखाई दिए हैं तो वह प्लाज्मा दे सकता है। इसके साथ ही उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं हाेनी चाहिए। एचआईवी, डायबिटीज, टीबी जैसी अन्य बीमारी डोनर को नहीं होनी चाहिए।

नई तकनीक से प्लाज्मा थेरेपी आसान  होगी
मेडिकल अस्पताल और कॉलेज के डीन डॉ. सजल मित्रा, सेक्रेटरी डॉ. संजय मुखर्जी की पहल पर यह सब संभव होने जा रहा है। इसके हेड डॉ. सुशांत मेश्राम हैं। नई तकनीक से प्लाज्मा थेरेपी आसान होगी। हम डोनर से अपील कर रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि इस काम से किसी और की जिंदगी बचाई जा सकती है। 
-डॉ. मोहम्मद फैजल, नोडल ऑफिसर, प्लाज्मा प्रोजेक्ट, शासकीय वैद्यकीय अस्पताल एवं महाविद्यालय

 इस तरह काम करेगी मशीन  
प्लाज्मा थेरेपी के लिए नई तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस मशीन का ऑर्डर दे दिया गया है। जल्द ही यह अस्पताल में पहुंच जाएगी। इस मशीन में डोनर से ब्लड मशीन के माध्यम से निकालेंगे। ब्लड मशीन में जाने के बाद उसमें प्लाज्मा पीले पानी के रूप में अलग ट्यूब से बाहर चला जाएगा। दूसरे ट्यूब से ब्लड फिर से डोनर के शरीर में चला जाएगा। इससे उन्हें कमजोरी महसूस नहीं होगी। इतना सबकुछ करने में मात्र आधा घंटा का समय लगेगा। 

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