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उपराजधानी नागपुर में हैं पुराने वाहनों की भरमार, स्क्रैप पॉलिसी लागू हुई तो 69 हजार वाहन होगे कम

उपराजधानी नागपुर में हैं पुराने वाहनों की भरमार, स्क्रैप पॉलिसी लागू हुई तो 69 हजार वाहन होगे कम

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर शहर में तेजी से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण पुराने वाहनों को स्क्रैप नहीं किया जा रहा है। हाल ही में वर्ष 2021 के बजट में 15 से 20 साल के पुराने वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैप पॉलिसी लाने की घोषणा की गई है। यदि ऐसा होता है, तो नागपुर शहर से ही 69 हजार से ज्यादा वाहनों को कबाड़ बनाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण कम हो सकता है। नागपुर शहर की बात करें तो इसमें कुल 13 लाख वाहन चल रहे हैं। जिसमें मोटरसाइकिल से लेकर बस शामिल हैं। नियमानुसार किसी भी वाहन को 15 साल तक ही चलाया जा सकता है। क्योंकि तब तक ही इसे पर्यावरण के लिए फिट माना जाता है। यदि इससे आगे चलाना है, तो इन वाहनों को फिटनेस जांच करानी होती है। जिसके बाद इसे आगे के 5 साल तक चलाया जा सकता है। 

शहर आरटीओ में 69642 वाहन
नागपुर शहर आरटीओ हद की बात करें तो इसमें कुल 69642 वाहन शामिल हैं। जिनकी उम्र 15 साल से ज्यादा की हो गई है। यह वाहन शहर में मौजूद होने से वायु प्रदूषण से लेकर ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्क्रैप पॉलिसी लागू होती है, तो उक्त 69 हजार से ज्यादा वाहनों को सड़कों से हटाना पड़ सकता है। 

सबसे ज्यादा मोटरसाइकिल, फिर कार की संख्या  
अधिकृत आंकड़ों के अनुसार शहर में 44141 मोटरसाइकिल हैं, जिनकी उम्र 15 साल से ज्यादा की हो गई है। वहीं कार की संख्या भी 22783 है। ट्रकों की बात करें तो 1647 पुराने वाहन मौजूद हैं। 406 ऑटो रिक्शा, 134 बस और 128 ट्रेलर भी शामिल हैं। इसके अलावा एग्रीकल्चर ट्रैक्टर, डंपर, मोटर कैब, प्राइवेट सर्विस व्हीकल, पॉवर ट्रैलर आदि वाहन शामिल हैं। 

सुधार आ सकता है
पुराने वाहनों की संख्या कम होने पर प्रदूषण कितने हद तक कम होगा, यह अनुमान लगाना मुश्किल है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का कम होने से निश्चित तौर पर थोड़ा सुधार हो सकता है।  - हेमा देशपांडे, सब रीजनल ऑफिसर, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड नागपुर

नोटिस भेजते हैं 
शहर में कुल 69 हजार से ज्यादा पुराने वाहनों की संख्या है, लेकिन अभी तक स्कैप पॉलिसी को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। पुराने वाहनों को मालिकों को नोटिस भेजा जाता है।  - वी. जाधव, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, शहर आरटीओ (अतिरिक्त प्रभार)

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