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इस्तीफे की धमकी को त्यागपत्र नहीं समझा जा सकता-हाईकोर्ट

February 16th, 2020 22:07 IST
इस्तीफे की धमकी को त्यागपत्र नहीं समझा जा सकता-हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई। इस्तीफे की धमकी को त्यागपत्र में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। त्यागपत्र तभी वैध माना जाएगा जब उसमें पद से मुक्त होने की तारीख व समय का उल्लेख होगा। विरोध व्यक्त करने व आत्मासम्मान  के लिए लिखे गए पत्र को त्यागपत्र नहीं समझा जा सकता है। एक महिला इंजीनियर को राहत देते हुए बांबे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में यह बात स्पष्ट की है। मुंबई महानगरपालिका में मार्च 2007 से सब इंजीनियर के रुप में कार्यरत नमिता उपरकर ने अपने स्थान पर किसी और अधिकारी को बैठा देख इसके विरोध में 4 अक्टूबर 2017 को अपना त्यागपत्र लिखकर भेज दिया था। उपरकर ने त्यागपत्र में लिखा था कि उसके टेबल पर किसी और का बैठना उसके लिए बेहद अपमानजनक है। ऐसे में अपने आत्मसम्मान को बरकरार रखने के लिए मुझे त्यागपत्र देना ही उचित लग रहा है। 

मनपा प्रशासन ने  उपरकर के पत्र का संज्ञान लिया और इसके लिए उसे चेतावानी भी दी। इसके बाद उपकर को लगा को सबकुछ सामान्य हो गया है। इस बीच मनपा प्रशासन ने उपरकर को एक पत्र भेजा जिसमें उपरकर को बताया गया कि 4 अक्टूबर 2017 को उसकी ओर से दिए गए त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया गया है। इसके जवाब में उपरकर ने मनपा प्रशासन को एक निवेदन दिया और कहा कि जब उसने त्यागपत्र लिखा था तो उसकी मनोदशा ठीक नहीं थी। वह नौकरी करने की इच्छुक है। इसलिए उसकी ओर से लिखे गए पत्र को त्यागपत्र न समझा जाए। लेकिन मनपा ने उपरकर के निवेदन को नहीं सुना और उसकी सेवा को जारी रखने से मना कर दिया। लिहाजा उपरकर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 


न्यायमूर्ति नितिन जामदार व न्यायमूर्ति एमएस कर्णिक की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान मनपा के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता(उपरकर) का त्यागपत्र वैध तरीके से स्वीकार किया गया है। त्यागपत्र स्वीकार करने के बाद कर्मचारी के पास इसे वापस लेने का अधिकार नहीं होता है। क्योंकि त्यागपत्र स्वीकार करने के बाद नियोक्ता व कर्मचारी का संबंध समाप्त हो जाता है। 

जबकि याचिकाकर्ता के वकील जोयल कारलोस ने साफ किया कि मेरे मुवक्किल ने सिर्फ अपना विरोध प्रकट करने के लिए पत्र लिखा था। इसे त्यागपत्र नहीं माना जा सकता है। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी त्यागपत्र को सही प्रारुप में वैध तरीके से स्वीकार किया जाता है तो ही उसे उचित माना जा सकता है। जहां तक बात याचिकाकर्ता की है तो उसके त्यागपत्र में कही पर इसका उल्लेख नहीं है कि वह तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रही है अथवा किसी निश्चित तारीख से। याचिकाकर्ता ने अपना विरोध प्रकट करने के लिए महज इस्तीफे की धमकी के तौर पर पत्र लिखा था जिसे मनपा ने त्यागपत्र में परिवर्तित कर दिया। यह सही नहीं। यह कहते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को मनपा प्रशासन को नौकरी में रखने का निर्देश दिया और उसे राहत प्रदान की।

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