दैनिक भास्कर हिंदी:  हाईकोर्ट के वकील की गोली मारकर हत्या करने वाले तीन आरोपियों को उम्रकैद

April 12th, 2019

डिजिटल डेस्क,सागर। जबलपुर हाईकोर्ट के वकील की गोली मारकर हत्या करने वाले 4 में से 3 लोगों को अपर सत्र न्यायाधीश विद्युत अधिनियम मुकेश कुमार ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना सात साल पहले जबलपुर में हुई थी। इसके बाद जबलपुर में वकीलों के हंगामा करने पर हाईकोर्ट ने केस को सागर ट्रांसफर कर दिया था। मामले में एक आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया है।

अपर लोक अभियोजक रविकांत सराफ ने बताया कि 16 अक्टूबर 2012 को गोलू ऊर्फ जितेंद्र यादव ने एएसपी घमापुर एमएस पटेल को सूचना दी कि शोभानगर रांझी निवासी चार आरोपियों ने हाईकोर्ट के वकील मनोज यादव की गोली मारकर हत्या कर दी है और फरार हो गए हैं। पुलिस घायल हालत में मनोज को मेडिकल कॉलेज ले गई। यहां डॉक्टरों ने उन्हेंमृत घोषित कर दिया।

रिपोर्ट में जितेंद्र ने बताया कि घटना वाले दिन वह अपने मामा मनोज यादव व साथी संदीप के साथ अलग-अलग बाइक से हाइकोर्ट से घर जा रहे थे। श्रीराम मंदिर टेस्टिंग रोड के पास पुराना शोभापुर जबलपुर निवासी आरोपी चिंटू ऊर्फ आशीष पिता अशोक यादव के साथ यहीं का रहने वाला राजेश पिता सुक्खूलाल यादव और बोनी उर्फ अनुपम पिता अशोक यादव आया और मनोज की बाइक के सामने बाइक लगा दी। इसके बाद राजेश यादव के कहने पर बोनी उर्फ अनुपम यादव ने पिस्टल से वकील मनोज की कनपटी पर फायर कर दिया। इससे मनोज बेहोश हो गया और आरोपी मौके से भाग निकले।

विपक्ष में केस नहीं लडने का दबाव बना रहे थे आरोपी

अधिवक्ता सराफ के अनुसार मृतक मनोज किसी मामले में पैरवी कर रहा था। आरोपी केस उस पर यह केस नहीं लडऩे के लिए दबाव बना रहे थे। मनोज ने उनकी बात नहीं सुनी तो आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने बोनी ऊर्फ अनुपम यादव, गंगू उर्फ आकाश यादव, चिंटू ऊर्फ आशीष यादव और राजेश यादव के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने तीन आरोपियों को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने आरोपी बोनी को उम्रकैद व अलग-अलग धाराओं में 6500 रुपए अर्थदंड तथा चिंटू उर्फ आशीष व राजेश यादव को आजीवन कारावास तथा 5-5 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। 

घटना में प्रयुक्त बाइक के कारण आरोपी बना था गंगू

आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए जिस बाइक का उपयोग किया था। वह बड़ा पत्थर जबलपुर निवासी गंगू उर्फ आकाश पिता राजकुमार उर्फ राजू सपेरा के नाम पर थी। इसी आधार पर पुलिस ने उसे हत्या में सहयोगी मानकर केस में आरोपी बनाया था।