दैनिक भास्कर हिंदी: अवनि बाघिन की मौत : आ गई फॉरेंसिक रिपोर्ट, नहीं मिले ट्रैंक्विलाइज़र से जुड़े सबूत

December 9th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अवनि के शरीर के किसी हिस्से में ट्रैंक्विलाइज़र के सबूत नहीं मिले हैं। यह इशारा करता है कि अवनी के शरीर पर डार्ट प्लांट किया गया था। फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। पहले ही तूल पकड़ चुके बाघिन अवनि की हत्या के मामले में अब हर दिन हो रहे नए खुलासे हो रहे हैं। मामले की जांच करने के लिए गठित दो सदस्यीय राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) कमेटी की रिपार्ट में शूटर असगर अली के दावे-आत्मरक्षा में गोली चलाने की दलील खारिज कर चुका है। उल्लेखनीय है कुछ एनिमल राईट्स संगठन पहले से ही आशंका जता रहे थे कि अवनि को पहले गोली मारी गई, बाद में बहोशी का इंजेक्शन लगाया गया। रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषण के दौरान बाघिन के शरीर के नमूनों में ट्रैंक्विलाइज़र केटामाइन और हेक्साजाइन के सबूत मिले हैं। हेक्साजाइन का इस्तेमाल घोड़ों, गाय, भैंस और बिल्ली जैसे पशुओं को शांत करने के लिए किया जाता है।  

फॉरेंसिक जांच में देरी पर सवाल

मामले में फॉरेंसिक जांच में हुर्द देरी पर भी सवाल उठ रहे हैं। भेजे गए मांस के नमूनों का विश्लेषण 26 नवंबर से शुरू हुआ और पांच दिसबंर तक चला। रिपोर्ट का से शुरू होने के लिए भेजे गए नमूनों की जांच 28 दिन बाद शुरू की गई। NTCA कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस पेश किया जाना भी संदेह उत्पन्न करता है।  

NGO ने सुप्रीम कोर्ट तक में लगाई थी गुहार

यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा के वन क्षेत्र में बाघिन अवनि (टी-1) को दो नवंबर देर रात मार दिया गया। बाघिन को बचाने के लिए प्रयत्न और सेव टाइगर NGO ने लेट अवनि लिव अभियान चलाया था और सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई थी। 

 सीएम ने की थी जांच की बात

मामले में सवाल उठने पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था, बाघिन के मारे जाने पर किसी को भी कोई खुशी नहीं है। वन विभाग ने यह फैसला किया क्योंकि उसने 13-14 लोगों को मार डाला था। इस पर कुछ संदेह है कि बाघिन को पहले गोली लगी या फिर बेहोश करने के लिए तीर मारा गया। इस तथ्य की जांच की जाएगी।  फडणवीस ने कहा कि उन्हें मुहैया कराई गई प्राथमिक रिपार्ट के अनुसार बाघिन को उस वक्त गोली मारी गई जब बाघिन ने उसे बेहोश करने की कोशिश कर रहे वनकर्मी पर हमला कर दिया।