दैनिक भास्कर हिंदी: छत्तीसगढ़ : अंबिकापुर पुलिस भर्ती प्रक्रिया में थर्ड जेंडर कैंडिडेट्स ने दिखाया अपना दम

September 5th, 2018

डिजिटल डेस्क, रायपुर । थर्ड जेंडर के प्रति अभी तक समाज में कोई खास स्थान नहीं बन पाया है, लेकिन रायगढ़ के महापौर पद की कुर्सी हासिल करने के बाद तृतीय लिंग के लोगों की जागरूकता बढ़ी है। छत्तीसगढ़ सरकार के नए नियमों के अनुसार अब प्रदेश में थर्ड जेंडर पुलिस में शामिल हो सकेंगे। इस नियम के लागू हो जाने से प्रदेश के तृतीय लिंग अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है। यही वजह है कि अंबिकापुर में चल रही पुलिस भर्ती प्रक्रिया में भी तृतीय लिंग अभ्यर्थियों ने अपना दम दिखाया है। किन्नरों की संस्था मितवा की अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य विद्या राजपूत ने इस पर खुशी जाहिर की है। विद्या राजपूत ने कहा, छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।  विद्या राजपूत ने बताया कि अक्षरा मंडल ने महिलाओं की कैटेगरी पुलिस भर्ती में फिटनेस टेस्ट पास किया है। 

इस दौरान भर्ती के दौरान अभ्यास करती एक अभ्यर्थी ने बताया कि अपने जीवन यापन के लिए वो दूसरे लोगों पर आश्रित है। कभी ट्रेन में तो कभी दुकानदारों से पैसे मांगकर अपना गुजारा करती है। लेकिन अब वह खुद कुछ करना चाहती है और उसके इसी जिद ने उसे पुलिस भर्ती के फिजिकल फिटनेस में पास भी करा दिया है। 

17 थर्ड जेंडर कैंडिडेट्स ने कराया था पंजीयन

अंबिकापुर में आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा में कुल 17 थर्ड जेंडर कैंडिडेट्स ने पंजीयन कराया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 2 अभ्यर्थी ही फिजिकल फिटनेस टेस्ट देने पहुंचे और इसमें से भी सिर्फ एक ने ही टेस्ट पास किया। हालांकि इससे पहले भी थर्ड जेंडर कैंडिडेट्स को अपनी किस्मत संवारने का मौका मिला है। कर्नाटक की पृथिका यशिनी और राजस्थान की गंगा को लंबी अदालती लड़ाई के बाद सफलता मिली थी। 

इस ट्रांसजेंडर ने खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा 

जालोर की गंगा कुमारी ने  2013 में कॉन्स्टेबल भर्ती में कड़ी मेहनत से लिखित परीक्षा, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट पास किए, उसका सिलेक्शन भी हो गया, लेकिन जब पोस्टिंग की बारी आई तो उसे टालमटोल वाला जवाब दिया जाता रहा। गंगा कुमारी ने 2 साल तक सरकार और विभाग से पॉजीटिव जवाब नहीं मिलने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

ट्रांसजेंडर के हक में गाइडलाइन जारी

गंगा कुमारी की ओर से अधिवक्ता रितुराज सिंह राठौड़ ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया, कि सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी बनाम सरकार के मामले में ट्रांसजेंडर के हक के संबंध में संपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। इसमें यह व्याख्या की गई है, कि अनुच्छेद 14, 16 व 21 जेंडर के मामले में न्यूट्रल हैं, कही भी यह नहीं लिखा गया है कि यह अनुच्छेद महिला या पुरुष पर लागू होगा। यह लिखा गया है कि यह भारत के नागरिक पर लागू होगा, इसलिए ट्रांसजेंडर इसकी परिभाषा में आएंगे और उनसे भेदभाव नहीं किया जा सकता।