comScore

कंटेनमेंट जोन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रायल शुरू

कंटेनमेंट जोन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रायल शुरू

डिजिटल डेस्क, नागपुर। दुनिया भर में कोरोना के लिए दवा और वैक्सीन बनाने का प्रयास चल रहा है। हाल ही में राज्य में कोरोना के लिए आयुष दवाओं की क्षमता पर ट्रायल शुरू करने को मंजूरी प्रदान की गई है। इसके लिए सीटीआरआई (क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री इंडिया) से पंजीयन करना जरूरी है। नागपुर स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेदिक मातृ व शिशु स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान ने दो आयुर्वेदिक दवाओं का ट्रायल शुरू किया है। संस्थान के प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. आर गोविंद रेड्डी ने बताया कि शहर के कंटेनमेंट जोन (मोमिनपुरा, सतरंजीपुरा, नाईक तालाब बांग्लादेश) और मेडिकल में ट्रायल जारी है। ट्रायल के तहत सुदर्शन घनवटी (बुखार की दवा) और गुडूची घनवटी (सर्दी और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा) का परीक्षण किया जा रहा है।

दो माह तक नियमित दवा देने के बाद संस्थान के विशेषज्ञ करेंगे अध्ययन
दोनों दवाओं के प्रभाव की जांच के लिए कंटेनमेंट जोन (प्रतिबंधित क्षेत्र) के 1500 लोगों को खुराक दी जा रही है। इसके अलावा, मेडिकल के 60 मरीजों पर भी ट्रायल हो रहा है। इसमें ऐसे भी मरीज शामिल हैं, जो ठीक होकर घर जा चुके हैं। ऐसे लोगों को 2 माह तक दवाओं की नियमित खुराक दी जाएगी। इसके बाद अन्य 500 मरीजों से इनकी तुलना की जाएगी। इसके बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक मातृ व शिशु स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ रोग प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन करेंगे। 11 जून से यह काम शुरू हो चुका है।

मेडिकल एजुकेशन एंड ड्रग से अनुमति
आयुर्वेद, यूनानी व होमियोपैथी से संबंधित संस्थान व लोगों को अपनी दवाओं के कोरोना पर प्रभाव जांचने के लिए ड्रग ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। राज्य के मेडिकल एजुकेशन एंड ड्रग (एमईडीडी) ने आईसीएमआर के दिशा-निर्देश का पालन करते हुए इस दिशा में कार्य करने को हरी झंडी  दे दी है। मेडिकल एजुकेशन, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के सचिव डॉ. संजय मुखर्जी कह चुके हैं कि राज्य में कोरोना वायरस पर आयुष रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।

कोरोना वायरस को प्रभावहीन बनाना है मकसद
हमारा दावा कोरोना ठीक करने वाली दवा बनाने का कतई नहीं है। हम मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाना चाहते हैं, ताकि कोरोना वायरस प्रभावहीन साबित हो। भारतीय जीवनशैली में योग, व्यायाम, आहार में हल्दी, लौंग, अश्वगंधा जैसी चीजों के उपयोग के कारण पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में कोरोना का असर कम रहा है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।  - डॉ. आर गोविंद रेड्डी, प्रभारी सहायक निदेशक, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक मातृ व शिशु स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान
 

कमेंट करें
8IFhi