दैनिक भास्कर हिंदी: कांग्रेस कार्यकर्ता मर्डर केस में दो आरोपी गिरफ्तार, फेसबुक पोस्ट के कारण हुई थी हत्या

October 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। फेसबुक पोस्ट के चलते हुए विवाद के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता मनोज दुबे की हत्या मामले में पुलिस ने मंगलवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में गिरफ्तार आरोपियों के नाम उमेश सिंह और जितेंद्र मिश्रा है। सूत्रों के मुताबिक विवाद के बाद दुबे ने सिंह की पिटाई कर दी थी, इसी का बदला लेने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हमला किया। दरअसल भाजयुमो सहसचिव आरजे शर्मा (आकाश) के फेसबुक पोस्ट से चांदीवली के विधायक नसीम खान के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे।

खान समर्थक दुबे को यह बात पसंद नहीं आई। फेसबुक पर एक दूसरे के खिलाफ कमेंट के बाद नाराज दुबे शर्मा के घर पहुंच गया, लेकिन वहां शर्मा नहीं था। इसके बाद वह उस जगह पहुंचा जहां अक्सर शर्मा अपने साथियों के साथ बैठता था। यहां दुबे को शर्मा के साथी सिंह और मिश्रा मिले तो इनके बीच तीखी बहस हुई। 45 वर्षीय दुबे को इस बात से काफी नाराजगी हुई कि उनसे उम्र में काफी छोटे लड़के उनका लिहाज नहीं कर रहे हैं। इसी के चलते दुबे ने सिंह को थप्पड़ मार दिए। 

लोगों के सामने पिटाई होने से सिंह काफी आहत था। उसने दुबे को सबक सिखाने की ठान ली। सूत्रों के मुताबिक सिंह ने पहले से ही हमले के लिए तलवार का इंतजाम कर लिया था। इसके थोड़ी ही देर बाद जैसे ही उसे दुबे दिखे उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उन पर हमला कर दिया। रविवार रात डेढ़ बजे के करीब असल्फा मेट्रो स्टेशन के पास दुबे का शव मिला था। साकीनाका पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की छानबीन कर रही है। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डीसीपी मंजुनाथ सिंगे ने बताया कि मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस बात की छानबीन की जा रही है कि हमले में और लोग शामिल थे या नहीं।

आरोपियों को बचा रही है पुलिस-नसीम खान

पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नसीम खान ने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को खान ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) देवेन भारती से मुलाकात कर धीमी जांच पर आपत्ति जताई। ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में खान ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शी बता रहे हैं कि छह लोगों ने दुबे पर हमला किया था लेकिन पुलिस ने सिर्फ दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह राजनीतिक हत्या है और राजनीतिक दबाव में ही दूसरे आरोपियों को बचाया जा रहा है। खान ने कहा कि जिस मंदिर के पास विवाद हुआ था वहां का ट्रस्टी सीसीवीटी कैमरा चालू होने की जानकारी दे रहा है लेकिन पुलिस का दावा है कि कैमरा बंद था। खान के मुताबिक भारती ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जरूरत पड़ने पर मामले की जांच साकीनाका पुलिस से लेकर अपराध शाखा को सौंपी जा सकती है।

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