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 आसमान से आफत की बरसात, फसलें बर्बाद -जिले में 40 हजार हेक्टेयर की गेहूं की फसल प्रभावित

 आसमान से आफत की बरसात, फसलें बर्बाद -जिले में 40 हजार हेक्टेयर की गेहूं की फसल प्रभावित

डिजिटल डेस्क,कटनी। बेमौसम बारिश ने लोगों को गर्मी से भले ही राहत दी है पर किसानों पर आफत बनकर गिरी। मंगलवार को दिन बादल छाए रहने से लोगों को बारिश होने की आशंका पहले से ही थी। मंगलवार की रात से रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ तो बुधवार सुबह तक चलता रहा। बारिश से सर्वाधिक नुकसान गेहूं की फसलों को हुआ। पानी पड़ने ने खेतों में खड़ी एवं खलिहान में रखी फसलें प्रभावित हुई। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बेमौसम बारिश से गेहूं की चमक में तो अंतर आएगा ही, खेतों में खड़ी फसल में झड़न बढ़ जाएगी। अभी जिले में 60 प्रतिशत ही गेहूं की कटाई हुई है और 40 हजार हेक्टेयर से अधिक की फसल कटना शेष है। इस साल जिले में एक लाख छह हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी। अन्य वर्षों की अपेक्षा इस साल गेहूं की फसल अच्छी थी, लेकिन बारिश ने बर्बाद कर दी।

दो दिन में  लुढका पारा
बादल, बारिश का असर तापमान पर भी पड़ा। दो दिन पहले सोमवार को सूर्यदेव आग बरसा रहे थे और तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया था। मंगलवार को बादल छाने से तापमान में 6 डिग्री  की गिरावट आ गई। बुधवार को अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस में अटक गया। रात का तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सब्जी की खेती  पर भी असर बेमौसम बारिश से सब्जी की फसलों पर भी असर पड़ा है। तेज बारिश से कई जगह टमाटर के पौधे टूटकर जमीन पर बिछ गए। करौंदी कला के रामकृपाल पांडेय ने बताया कि उन्होने आधा एकड़ में टमाटर की फसल लगाई थी। बारिश से टमाटर बिखर गए। खेत में खड़ी गेहूं की फसल भी बिछ गई। धरवारा के जुगल किशोर गर्ग के अनुसार यह बारिश गेहूं के लिए आफत बन बन गई है। दो-चार दिन में कटाई  होना थी अब हफ्ते भर इंतजार करना पड़ेगा। कई जगह खेत में फसल बिछ जाने से बालियां टूट गई हैं।

यह है जिले में औसत उत्पादन की स्थिति
भू-राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कटनी जिले में गेहूं का औसत उत्पादन तीन हजार क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। 2018 के फसल कटाई आंकड़ों के अनुसार सिंचित गेहूं की उपज 2954 किलोग्राम एवं असिंचित गेहूं की उपज 2366 किलोग्राम प्रति हेक्टयर थी। बड़वारा तहसील में सिंचित रकबा की सर्वाधिक 3996 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। रीठी में 3229 किलोग्राम, बरही में 2631 किलोग्राम, बहोरीबंद में 3163 किलोग्राम, कटनी में 2745 किलोग्राम, विजयराघवगढ़ में 3167 किलोग्राम और ढीमरखेड़ा में 2666 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपज थी।

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