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  विदर्भ वैधानिक विकास मंडल : रिकॉर्ड रखना भी हुआ मुश्किल

  विदर्भ वैधानिक विकास मंडल : रिकॉर्ड रखना भी हुआ मुश्किल

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  विदर्भ वैधानिक विकास मंडल का कार्यकाल 30 अप्रैल 2020 को समाप्त होने के बाद सरकार या राज्यपाल ने अब तक मंडल का कार्यकाल आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई है।  विदर्भ विकास के सभी काम ठंडे बस्ते में पड़े हैं। न कोई नया अध्ययन हो रहा है और न क्षेत्र संबंधित बैकलॉग के आंकड़े सामने आ रहे हैं। विदर्भ के हिस्से का पैसा अन्यत्र खर्च किया जा रहा है।  मंडल के कर्मचारियों का कार्यकाल भी 31 अगस्त 2020 को खत्म हो गया है। कार्यालय में कर्मचारी नहीं होने से मंडल के रिकॉर्ड का रख-रखाव, विशेष निधि का इस्तेमाल बाबत उपयोगिता प्रमाणपत्र, लेखा परीक्षण आदि काम अटक गए हैं। फिलहाल रिकॉर्ड अपडेट रखने आदि काम के लिए सरकार ने नए 17 अस्थायी पदों को मंजूरी दी है, ताकि उसकी जानकारी सरकार को मिलती रहे।

51 पदों की दी मंजूरी
समय-समय पर विकास और बैकलॉग के अध्ययन के जरिए सरकार ने मंडलों को विशेष निधि प्रदान की। राज्यपाल खुद इस पर नजर बनाए रखते थे। यह पहला मौका है, जब मंडल का कार्यकाल खत्म हुए 4 महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन सरकार या राज्यपाल ने कार्यकाल बढ़ाने को लेकर कोई चर्चा नहीं की। इससे विदर्भवादियों में रोष है। सरकार गंभीर नहीं होने के आरोप लग रहे हैं। अब तो 31 अगस्त को कर्मचारियों की मान्यता भी खत्म हो गई। कार्यालयीन कामकाज देखते हुए सरकार ने विदर्भ के 17 अस्थायी पदों सहित मराठवाड़ा, खानदेश विकास मंडल के 51 अस्थायी पदों को मंजूरी दी है।

विदर्भ को बड़े पैमाने पर नुकसान 
विदर्भ वैधानिक मंडल के माध्यम से विकास कार्यों पर निगरानी और नियंत्रण रहता था, लेकिन मंडल की मियाद 30 अप्रैल को खत्म होने के बाद से अब विदर्भ विकास को लेकर कोई गंभीर नहीं है। न कोई अध्ययन हो रहा है और न किसी तरह की निधि मिल रही है। विकास और बैकलॉग के आंकड़े भी आने बंद हो गए हैं। इससे विदर्भ को बड़ा नुकसान होगा।  -संजय खड़क्कार, पूर्व विशेषज्ञ सदस्य, विदर्भ वैधानिक विकास मंडल 
 

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