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दिव्यांग कर्मचारियों के पदोन्नति के लिए क्या कर रही सरकार

दिव्यांग कर्मचारियों के पदोन्नति के लिए क्या कर रही सरकार

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा है कि वह दिव्यांगों के लिए समूह ए व बी के पदों पर पदोन्नति के अधिकार को कैसे सुनिश्चित करेगी। जिससे उनका यह अधिकार कुंठित न हो। पर्सन विथ डिसेबलिटी कानून में दिव्यांगों के लिए पदोन्नति का प्रावधान किया गया है। जिसे लागू किए जाने की मांग को लेकर विभिन्न विभागों के कई दिव्यांग कर्मचारियों ने कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उपरोक्त पदों पर दिव्यांगों के पदोन्नति के अधिकार को लागू करने की मांग की गई है। 

न्यायमूर्ति नितीन जामदार व न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की खंडपीठ ने इन याचिकाओ पर सुनवाई के बाद कहा कि सरकार हमे यह बताए कि वह कौन से सकारात्मक कदम उठाने की इच्छुक है जिससे दिव्यांग कर्मचारियों के पदोन्नति का अधिकार सुरक्षित हो सके। इससे पहले सरकारी वकील ने कहा कि मंत्रिमंडल इस विषय से जुड़ी नीति पर विचार कर रहा है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से भी इस बारे में मार्गदर्शन मांगा है। पर फिलहाल दिव्यांगों के लिए अलग से पद रखने के लिए आश्वासन नहीं दिया जा सकता। 

वहीं याचिकाकर्ताओ की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुगंध देशमुख ने कहा कि राज्य के महाधिवक्ता ने साल 2018 में अदालत को आश्वासन दिया था किराज्य सरकार दिव्यांगों के लिए समूह ए व बी के पदों की पहचान करेगी लेकिन अब तक इस विषय पर कुछ नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कानून ने पदोन्नति को लेकर दिव्यांगों के अधिकार घोषित किए हैं तो इस बारे में किसी नीतिगत निर्णय की जरूरत नजर नहीं आती है। सिर्फ पदोन्नति का स्वरूप तय करने की जरुरत है। 

इस पर खंडपीठ ने भी कहा कि इस मामले में नीति की नहीं सिर्फ पदोन्नति के स्वरूप को तय करने की जरुरत है। खंडपीठ ने कहा हमने सरकार को इस बारे में एक समरुप निर्णय लेने का सुझाव दिया था पर इस दिशा में भी कुछ नहीं हुआ है। इसलिए हम इस मामले में जारी अपने अंतरिम आदेश को बरकरार रखते हैं। जिसके तहत हमने याचिकाकर्ताओ के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार को पदोन्नति के बारे में अंतिम निर्णय लेने से रोका है। फिलहाल हम सरकार को इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिए एक और मौका देते हैं। ताकि हम यह जान सके कि सरकार दिव्यांगों के पदोन्नति के अधिकार को कुंठित होने से कैसे बचाएगी। खंडपीठ ने अब इस मामले से सभी संबंधित याचिकाओ पर सुनवाई 19 जनवरी 2021 को रखी है। 
    
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।