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143 किलोमीटर सफर तय कर जब बस स्टैंड पहुंचा दुर्लभ सांप

June 17th, 2018 17:21 IST
143 किलोमीटर सफर तय कर जब बस स्टैंड पहुंचा दुर्लभ सांप

डिजिटल डेस्क, अमरावती। मेलघाट के घने जंगल से दुर्लभ प्रजाति का सांप मेहमान बनकर करीब 156 किलोमीटर का सफर बस से तय कर बडनेरा बस स्टैंड पहुंचा। इस दौरान सर्पमित्रों को सूचना दी गई थी। मौके पर पहुंचकर उन्होंने सांप को पकड़कर उसे वनविभाग के हवाले कर दिया। जानकारी के मुताबिक 14 जून को मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प  के घने जंगल से गुजरकर आनेवाली राज्य परिवहन मंडल की बस धारणी से अमरावती अंतर्गत बडनेरा पहुंची। जैसे ही यात्रियों को बस में सांप नजर आया। सांप को देखते ही हड़कंप मच गया। भूषण सायंके, सर्पमित्र के मुताबिक फॉस्टर्न प्रजाति के दुर्लभ सांप का वैज्ञानिक नाम बॉइगा फॉस्र्टनी है। भारत में सर्वप्रथम इस सांप को डुमेरिल और बिब्रॉन ने 1854 में खोज निकाला था।

सर्प मित्र को सूचना
आगार के सुरक्षा रक्षक मारोती पंडित ने वसा संस्था के पशु मित्र गणेश अकर्ते को फोन पर सांप दिखने की सूचना दी। लेकिन पुणे में किसी प्रशिक्षण में व्यस्त होने के चलते उन्होंने तत्काल सर्पमित्र भूषण सायंके व मुकेश मालवे को सूचना दी। जिसके बाद दोनों तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सांप को अपने नियंत्रण में ले लिया। दुर्लभ प्रजाति के इस सांप को जंगल में छोडऩे के लिए वसा संस्था द्वारा उपवनसंरक्षक हेमंत मीना को आवेदन दिया गया। वनविभाग ने तत्काल फैसला लेते हुए दुर्लभ सांप को मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प के उपवनसंरक्षक विनोद शिवकुमार के सुपूर्द किया। उन्होंने सांप को  जंगल में छोड़ दिया।

बस्ती में पहली बार दिखा
बताया जा रहा है कि फास्टर्न प्रजाति का यह दुर्लभ सांप कम जहरीला होने के साथ ही केवल मेलघाट के घने जंगल कोह और कुंड परिसर में पाया जाता है। यह पहली बार है, जब गलती से यह दुर्लभ प्रजाति का सांप मानव बस्ती में नजर आया। आमतौर पर घने जंगलों में ऊंचे पेड़ों पर यह सांप पाया जाता है। करीब 15 वर्ष बाद सांप दिखाई देने से यह प्रजाति मेलघाट में होने की पुष्टि की गई है। जिले के मेलघाट में मांजर्या तथा फॉस्टर्न का मांजर्या इस तरह सांप की दो प्रजाति है। इनमें फॉस्टर्न दुर्लभ माना गया है। वर्ष 2003 में जब फॉस्टर्न सांप पाया गया था, उस समय उसकी लंबाई 4 फीट 5 इंच थी। वहीं बस डीपो से रेस्क्यु फॉस्टर्न की लंबाई 3 फीट 9 इंच है। 
 

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक का काउंटडाउन शुरु हो चुका हैं। 23 जुलाई से शुरु होने जा रहे एथलेटिक्स त्यौहार में भारतीय दल इस बार 120 खिलाड़ियों के साथ 18 खेलों में दावेदारी पेश करेगा। बता दें 81 खिलाड़ियों के लिए यह पहला ओलंपिक होगा। 120 सदस्यों के इस दल में मात्र दो ही खिलाड़ी ओलंपिक पदक विजेता हैं। पी.वी सिंधू ने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर तो वहीं मैराकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।

भारत पहली बार फेंनसिग में चुनौता पेश करेगा। चेन्नई की भवानी देवी पदक की दावेदारी पेश करेंगी। भारत 20 साल के बाद घुड़सवारी में वापसी कर रहा है, बेंगलुरु के फवाद मिर्जा तीसरे ऐसे घुड़सवार हैं जो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

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युवा कंधो पर दारोमदार

टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने जा रहे भारतीय दल में अधिकतर खिलाड़ी युवा हैं। 120 खिलाड़ियों में से 103 खिलाड़ी 30 से भी कम आयु के हैं। मात्र 17 खिलाड़ी ही 30 से ज्यादा उम्र के होंगे। 

भारतीय दल में 18-25 के बीच 55, 26-30 के बीच 48, 31-35 के बीच 10 तो वहीं 35+ उम्र के 7 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस लिस्ट में सबसे युवा 18 साल के दिव्यांश सिंह पंवार हैं, जो शूटिंग में चुनौता पेश करेंगे, तो वहीं सबसे उम्रदराज 45 साल के मेराज अहमद खान होंगे जो शूटिंग में ही पदक के लिए भी दावेदार हैं।