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पत्नी बार-बार मायके जाती है लेकिन यह तलाक का कारण नहीं हो सकता

पत्नी बार-बार मायके जाती है लेकिन यह तलाक का कारण नहीं हो सकता

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि पत्नी का अपने मायके जाना उसे तलाक देने का आधार नहीं हो सकता। यदि कोई पति अपनी पत्नी द्वारा दी जा रही मानसिक प्रताड़ना को आधार बना कर कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर करता है, तो उसे मानसिक प्रताड़ना साबित करनी होगी। पत्नी बार बार मायके जाती है, ससुराल वालों के लिए खाना नहीं बनाती या उनका ध्यान नहीं रखती, ये सब बेहद मामूली बातें हैं, जो वैवाहिक जीवन में होती रहती हैं। इस निरीक्षण के साथ न्यायमूर्ति अतुल चांदुरकर व न्यायमूर्ति पुष्पा गनेड़ीवाला की खंडपीठ ने पारिवारिक न्यायालय द्वारा जारी तलाक के आदेश को खारिज कर दिया। 

ये थे पति के आरोप 
योगिता और विनोद का विवाह दिसंबर 2010 में बौद्ध परंपरा के अनुसार हुआ था। विनोद को अपने पहले विवाह से दो बेटियां थीं और उसकी 80 वर्षीय वृद्ध मां थी। पति का आरोप है कि विवाह के बाद पत्नी बेटियों व सास का ध्यान नहीं रखती थी। बार-बार अपने मायके चली जाया करती थी। वह न तो खाना बनाती और न ही परिवार की देखभाल करती। उलट बार-बार आत्महत्या करके पति को जेल पहुंचाने की धमकी दिया करती थी। सितंबर 2011 को फिर मायके लौट गई। पति ने इन शिकायतों के आधार पर पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी दायर की थी। पत्नी ने अपनी सफाई में कहा था कि पति उससे बुरा बर्ताव करता था। उसे घर में नौकरानी बना कर रखा जाता था। बार-बार जान से मारने की धमकी दी जाती थी। मानसिक तनाव व खराब स्वास्थ्य के कारण उसने पति को छोड़ मायके लौटने का फैसला किया था। पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय से विनती की कि वे दोनों को साथ रहने के आदेश जारी करें और तब तक उसे मेंटेंनेंस दिया जाए। पारिवारिक न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पति के पक्ष में फैसला दिया और तलाक मंजूर कर लिया। पत्नी को 1500 रुपए का अंतरिम मेंटेनेंस देने के आदेश दिए गए।

हाईकोर्ट का फैसला
 पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने पति से इस बात के सबूत मांगे कि पत्नी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। हाईकोर्ट में पति ने साफ किया कि उसने न तो पहले कभी पत्नी के बर्ताव पर शिकायत की और न ही पत्नी को कोई नोटिस देकर सचेत किया। पति किसी भी घटना या दस्तावेज के आधार पर पत्नी की क्रूरता साबित नहीं कर सका। ऐसे में उक्त निरीक्षण के साथ हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय द्वारा जारी तलाक का आदेश रद्द कर दिया। वहीं, पत्नी को दिया जा रहा 1500 रुपए का अंतरिम मेंटेनेंस बढ़ा कर 5000 रुपए प्रतिमाह कर दिया। पति को 8 सप्ताह के भीतर मेंटेनेंस का बकाया अदा करने के आदेश दिए गए हैं। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।