दैनिक भास्कर हिंदी: महिलाएं कर रही मिट्टी परीक्षण, 50 गांवों में मिला खेती को बढ़ावा

August 1st, 2017

डिजिटल डेस्क, मंडला। स्लेक उपयोजना के तहत मंडला जिले के 50 गांवों में जलवायु परिवर्तन के आधार पर जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की कयावद की जा रही है। खेतों में उत्पादकता बढ़े, इसके लिए जरूरी है कि मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में पोषण तत्व रहें। मिट्टी में पोषक तत्व परीक्षण के लिए 'मिट्टी परीक्षण यूनिट' बनाई गई है। इसे महिलाएं चला रही हैं। BRC भवन मंडला में प्रयोगशाला का संचालन किया जा रहा है। तीन युवतियों को परीक्षण का जिम्मा सौंपा गया है।

आजीविका मिशन ने मंडला और बिछिया के 25-25 गांवों को स्लेक (संवाहनी आजीविका एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन) उपयोजना के लिए चुना है। यहां किसानों को जलवायु के हिसाब से खेती करने के गुर सिखाए जा रहे हैं। मौसम का हाल जानने के लिए यंत्र भी लगाए हैं। मौसम के अनुरूप फसल की बोवनी और आधुनिक तरीके से जैविक खेती कराई जा रही है। मिट्टी में पोषण तत्वों की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। 

यहां 50 गांवों में करीब 2000 किसान शामिल है। किसानों के खेतो में मिट्टी का परीक्षण करने के लिए आजीविका के सहयोग से महिष्मती संकुल स्तरीय संगठन ने मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला खोली है। BRC भवन में प्रयोगशाला का संचालन महिलाएं कर रही हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किसानों को प्रयोगशाला का लाभ मिल रहा है। यहां अब तक 200 किसानों ने मृदा परीक्षण कराया है। सभी 2000 किसानों के मिट्टी परीक्षण कर पोषण तत्वों की कमी पूरी की जाएगी। जिससे किसान उत्पादन बढ़ा सके। 

तीन युवतियों को किया प्रशिक्षत

मिट्टी परीक्षण के लिए तीन युवतियों दीपशिखा, राजकुमारी, और हिना को प्रशिक्षित किया गया है। एक माह के प्रशिक्षण के बाद युवतियां मिट्टी के नमूने लेना ओर टेस्ट आसानी से कर सकती है। इस प्रयोगशाला से तीन युवतियों ओर महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। 

दो टेस्ट किट के साथ 13 पेरामीटर टेस्ट

यहां प्रयोग शाला में दो टेस्ट किट रखी गई है। जिसमें 13 पेरामीटर टेस्ट किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा प्रयोगशाला का संचालन किया जा रहा है। जिसमें तीन पैरामीटर टेस्ट हो रहे है। पीएच और एनपीके तत्व की स्थिति पता चल रही है। लेकिन महिलाओं द्वारा संचालित प्रयोगशाला में पीएच, ईसी, ओसी, कार्बन, निथ्रोगन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, आयरन, जिंक, कोपर, मैग्नीश, लाईम समेत अन्य तत्वों की स्थिति पता चल रही है।

स्लेक प्रोजेक्ट के यंग प्रोफेशनल ज्ञानेन्द्र प्रताप ने कहा कि मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला का संचालन महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है। स्लेक प्रोजेक्ट के तहत 50 गांव के किसानों के खेतों में मृदा परीक्षण किया जाएगा, परीक्षण शुरू भी कर दिया गया है।