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चेन्नई की सॉफ्टवेयर कंपनी ने बदल दी 8 सरकारी स्कूलों की तस्वीर, अब होती है हाइटैक पढ़ाई

चेन्नई की सॉफ्टवेयर कंपनी ने बदल दी 8 सरकारी स्कूलों की तस्वीर, अब होती है हाइटैक पढ़ाई

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक रामकृष्ण यालामंचिली ने बालाघाट जिले के कान्हा नेशनल पार्क से लगे आदिवासी बाहुल्य ग्रामों की 08 शालाओं की तस्वीर ही बदल दी है। इन शालाओं में यालामंचिली कंपनी की मदद से एलईडी टीवी की स्क्रीन पर बच्चों को पढ़ाया जाता है। यालामंचिली कंपनी की ओर से इन शालाओं को कुल मिलाकर 50 लाख रुपए से अधिक की मदद की गई है।

चेन्नई की सॉफ्वेयर कंपनी यालामंचिली के मालिक रामकृष्ण यालामंचिली वर्ष 2017 में कान्हा नेशनल पार्क के भ्रमण पर आए थे, उनके मन में जिज्ञासा हुई कि नेशनल पार्क से लगे ग्रामों के स्कूलों में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाता है, यह देखा जाए। यह देखने के लिए वे शासकीय प्राथमिक शाला गुदमा पहुंचे और वहां के बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में चर्चा की। बच्चों से चर्चा के दौरान उन्हें पता चला कि यहां पर बच्चों को केवल पुस्तकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। इस पर उन्हें आश्चर्य हुआ और इसके बाद उन्होंने शाला के शिक्षक श्रीब्रम्हनोटे से चर्चा कर कहा कि वे कान्हा नेशनल पार्क से लगे ग्रामों की शालाओं में शिक्षा के लिए आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं, जिससे बच्चे नवीनतम तकनीक के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे और शाला में बुनियादी आवश्यकता की सभी चीजें उपलब्ध हो जाएंगी। शिक्षक ब्रम्हनोटे ने अपने क्षेत्र के बीआरसी  हेमंत राणा से यह बात बताई तो वे भी खुश हो गए।


पाठ्यसामग्री को कम्प्यूटर में अपलोड किया
रामकृष्ण यालामंचिली ने अपनी कंपनी में कक्षा पहली से लेकर कक्षा 08 तक की सभी पाठ्यसामग्री को कम्प्यूटर में अपलोड कर एक सॉफ्टवेयर बना दिया है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से बड़ी एलईडी टीवी स्क्रीन पर शिक्षक बच्चों को बड़ी आसानी से पढ़ा सकते हैं। मदद के लिए शासकीय प्राथमिक शाला गुदमा, लगमा, भीमा, डोंडियाटोला, सहेगांव, सारसडोल, पांड्याटोला एवं माध्यमिक शाला सारसडोल का चयन किया गया और कंपनी के इंजीनियर ने आकर इन शालाओं में एक नालेज टर्मिनल स्थापित कर दिया है। नॉलेज टर्मिनल को इस तरह बनाया गया है, जिसमें कक्षा 1 से लेकर 8 तक की समस्त पुस्तकों को हिन्दी माध्यम में सॉफ्ट कापी में इंस्टाल किया गया है, जिससे शिक्षक आसानी से उसे टी वी में दिखा कर अध्यापन कार्य करा सकते हैं। साथ ही इस नॉलेज टर्मिनल में शैक्षिक विडियो को भी इंस्टॉल किया गया, जिससे बच्चे मनोरंजन के साथ बच्चों को पढ़ा सके । इस नॉलेज टर्मिनल में पेन ड्राइव लगाने की सुविधा भी प्रदान की गई है। जिससे अन्य जगहों से प्राप्त शैक्षिक वीडियों को दिखा कर बच्चों के ज्ञान को बढ़ाया जा सके। इस टर्मिनल में 24 घंटे बिजली देने वाली बैटरी एवं इनवर्टर, 42 इंच की एलईडी टीव्ही एवं इसी टीव्ही को शिक्षक के पढ़ाने के लिए तैयार किये गये डायस से जोड़ा गया है। शिक्षक अपने डायस पर लगी बटनों के माध्यम से टीव्ही को संचालित कर सकता है।


यहां भी दी सहायता
चयनित शालाओं में 2 लाख रुपये की लागत से बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय एवं हाथ धोने के लिए बेसिन लगावाया गया है। शाला में लगे हेंडपंप मेंसबमर्सिबल पंप लगाकर शौचालय में एवं बच्चों के पीने के लिए साफ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शाला के बच्चों के लिए उनकी उंचाई के अनुसार डेस्क उपलब्ध कराई गई है। शाला के सभी क्लासरूम में एक-एक घड़ी लगवाई गई है। कंपनी की ओर से इन शालाओं में ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत की समस्या को देखते हुए 24 बोल्ट की बैटरी एवं साथ में इंवर्टर भी प्रदान किया गया है। ताकी जब भी शाला में विद्युत ना रहे तो इस बैटरी के उपयोग से बच्चों को नालेज टर्मिनल एवं टी वी के माध्यम से शैक्षणिक कार्य कराया जा सके ।
 

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