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कोरोना से ठीक हुए युवा जूझ रहे अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से

कोरोना से ठीक हुए युवा जूझ रहे अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से

डिजिटल डेस्क, नागपुर । कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं। अधिकतर मरीजों में थकान, नींद नहीं आना, सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या है। इसी को देखते हुए "पोस्ट कोविड' ओपीडी की शुरुआत विभिन्न अस्पतालों में हुई है।  नागपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल), इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान केंद्र (एम्स) में "पोस्ट कोविड' ओपीडी चल रही है। जिले में सबसे पहले मेडिकल अस्पताल में इसे शुरू किया गया था। शुरू में माना जा रहा था कि कोविड का प्रभाव युवाओं पर कम है। परंतु कोरोना से ठीक हो चुके लोगों की ओपीडी में आने वालों में युवाओं की भागीदारी 47 प्रतिशत है। इससे साफ है कि ठीक होने के बाद भी कई तरह की परेशानियां युवाओं को है। इसका खुलासा मेडिकल अस्पताल से मिले आंकड़ों में हुआ है। यहां की "पोस्ट कोविड' ओपीडी में 20-40 वर्ष के युवा ज्यादा आ रहे हैं। 

31 अगस्त से 28 अक्टूबर तक 187 मरीज 
मेडिकल अस्पताल में 31 अगस्त से "पोस्ट कोविड' ओपीडी की शुरुआत हुई थी। मेडिकल के आंकड़ों के अनुसार, ज्यादातर मरीज 20 से 40 साल के हैं। ओपीडी में 31 अगस्त से 28 अक्टूबर तक कुल 178 मरीज अाए हैं। इसमें से 85 मरीज 20-40 वर्ष की आयु के हैं। इनमें 46 महिलाएं और 39 पुरुष शामिल हैं। इस हिसाब से 47 प्रतिशत मरीज युवा हैं। इसके अतिरिक्त 10-20 साल की उम्र के 3 मरीज आए, जिसमें 2 पुरुष 1 महिला, 40-50 आयु वर्ग के कुल 39 मरीजों में 18 पुरुष, 21 महिलाएं, 50-60 आयु वर्ग के 42 मरीजों में 19 पुरुष, 23 महिलाएं और 60-70 आयु वर्ग में केवल 9 मरीज आए। इसमें 5 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार 10-20 वर्ष के 1.6 प्रतिशत, 40-50 वर्ष के 21.91 प्रतिशत, 50-60 वर्ष के 23.59 प्रतिशत मरीज और 60-70 वर्ष के 5.05 प्रतिशत मरीज आए।

20 अगस्त से 20 सितंबर के बीच मिले थे ज्यादा मरीज
20 अगस्त से 20 सितंबर तक शहर में कोरोना का "पीक' था। बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मिले थे। इस दौरान प्रतिदिन होने वाली मृत्यु का आंकड़ा भी कई बार 50 के पार गया था। 

समस्या
काम करने पर जल्दी थकान होना, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, नींद नहीं आना, कमजोरी महसूस होने जैसी समस्याएं मरीजों को हो रही हैं। इस तरह की समस्याएं कोरोना होने के बाद कब तक रहती हैं, यह तय नहीं है।

जरूरत पड़ने पर दवाई दी जाती है
मरीजों को ज्यादातर जल्दी थकान होना, सांस लेने में तकलीफ होना, घबराहट, नींद नहीं आना, कमजोरी जैसी समस्याएं हो रही हैं। इसके लिए सही आहार, श्वसन व्यायाम और शारीरिक व्यायाम जरूरी है। जरूरत पड़ने पर दवाई दी जाती है।  डॉ. अविनाश गावंडे, अधीक्षक, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।