अजब- गजब: जानें क्या होता है ब्लैक होल? क्या वैज्ञानिकों ने देखी इसके बनने की प्रक्रिया

February 26th, 2022

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे अंतरिक्ष में ऐसे कई राज़ हैं जिसके बारे में लगातार वैज्ञानिकों की खोज जारी हैं। ऐसा ही एक राज़ है ब्लैक होल, जिसके बारे में जानने की वैज्ञानिकों की खोज अभी भी जारी है। बीते कुछ सालों में ब्लैक होल के बारे में वैज्ञानिकों ने बहुत सी नई जानकारियां खोज निकाली हैं। कुछ सालों पहले ही ब्लैक होल की वास्तविक तस्वीर सामने आई है। लेकिन अब तक हम यह नहीं जान सके हैं कि इनकी उत्पत्ति कैसे होती है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने ब्लैक होल के बनने की प्रक्रिया ‘देखी’ है।

नेचर और एस्ट्रोफिजकल जर्नल में प्रकाशित दो शोधपत्रों में शोधकर्ताओं ने ऐसी प्रक्रिया देखने का दावा किया है जो ब्लैक होल के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में अच्छे संकेत दे रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि निरीक्षण और सैद्धांतिक दोनों ही आधारों पर ब्लैक होल तब बनता है जब किसी बड़े तारे के मरते समय उसका केंद्र सिकुड़ जाता है। 

क्या है ब्लैक होल
मरते तारों की प्रतिक्रिया बताती है कि यदि मूल तारा सूर्य के भार से 40-50 गुना बड़ा हो, तो एकत्रीकरण जारी रहता है और विचित्र स्थिति बन जाती है जिसे गुरुत्व सिंग्युलैरिटी और आम बोलचाल में ब्लैक होल कहते हैं। 

शोध
वैज्ञानिकों की मानें तो तारों का क्रोड़ तीव्र न्यूक्लीयर प्रतिक्रियाओं की वजह से निकलती तपन के कारण दबाव पैदा करता है। लेकिन जैसे ही तारे की ऊर्जा खत्म होती है और जब न्यूक्लीयर प्रतिक्रियाएं रुक जाती हैं, तो तारे की अंध्रुनी परतें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से अंदर की ओर सिकुड़ने लगती हैं और असामान्य घनत्व हासिल करने लगती हैं। उसे ही सिकुड़ता हुआ तारा कहते हैं।

लीवरपूल की जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिस्क के रीडर डेनियल पर्ले के इस शोध में बताया है कि उन्होंने हाल ही में दो ऐसी घटनाएं देखी हैं जो ब्लैक होल के निर्माण का कारण हैं। 2019 और 2021 में देखी गई इन घटनाओं में गामा रे प्रस्फोट की तरह बहुत ही तेज विस्फोट देखा जो एक बहुत ही तेजी से घुमते हुए छोटी मात्रा के पदार्थ निकाल रहा था। इससे निकलने वाला पदार्थ पास के वातावरण में गैस में बदल रहा था।

शोधकर्ता मानते हैं कि इसके अलावा भी ब्लैक होल बनने की कई संभावनाएं हो सकती हैं। अपने नतीजों की पुष्टि के लिए शोधकर्ता इस तरह की और भी घटनाओं का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास है कि उन्होंने जो देखा वह ब्लैक होल की उत्पत्ति की ही घटनाएं हैं।