दैनिक भास्कर हिंदी: खजुराहो मंदिर की रोचक मान्यताएं, पढ़ें क्यों बनी हैं नग्न मूर्तियां ?

August 1st, 2017

 
डिजिटल डेस्क, खजुराहो। खजुराहो के मंदिर अपनी सुंदरता और मूर्तियों के लिए दुनिया भर में फेमस है। इस मंदिर की दीवारों पर कामुक और संभोग को दर्शाते हुए मूर्तियां बनाई गई हैं, जिन्हें देखकर अच्छे-अच्छे लोग चक्कर खा जाते हैं। इन मूर्तियों को इस अंदाज से बनाया गया है कि इन्हें देखकर कभी भी किसी के मन में गलत ख्याल नहीं आता और सब इन मूर्तियों की खूबसूरती में ही खो जाते हैं। आप भी कभी खजुराहो के मंदिर गए हैं, तो आपके मन में भी कभी ख्याल आता होगा कि आखिर मंदिर में ऐसी मूर्तियां क्यों बनाई गई हैं? लेकिन आपको किसी ने इसका कारण नहीं बताया होगा। आज हम आपको इन मूर्तियों के पीछे की राेचक अाैर अनोखी मान्यताअों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप समझ सकते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है...?

आपको बता दें कि खजुराहो के मंदिरों को 950 ई. से 1050 ई. के बीच बनाया गया है।  शुरुआत में इसमें 85 मंदिर थे लेकिन अब सिर्फ 22 मंदिर ही बचे हैं। 


1. इन मूर्तियों को बनाने के पीछे जो मान्यता है, उसके मुताबिक कहा जाता है कि पुराने समय में राजा-महाराज भोग-विलासिता में रहते थे और ज्यादातर समय संभोग में ही बिताते थे। इस कारण उन्होंने इस तरह की मूर्तियां बनवाईं। 

2. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि ये मंदिर सेक्स एजुकेशन देने के लिए बनाए गए होंगे। उस समय मंदिर ही ऐसा स्थान था, जहां लोग आते थे। इस कारण मंदिर में ये मूर्तियां बनवाई गई होंगी ताकि लोगों को सेक्स एजुकेशन मिल सके। 

3. माना जाता है कि मोक्ष के लिए हर इंसान को चार रास्तों से होकर जाना पड़ता है- धर्म, अर्थ, योग और काम। इसलिए विश्लेषकों का मानना है कि मंदिर के बाहर नग्न और कामुक मूर्तियां इसलिए बनवाई गई क्योंकि यही काम है। और इसके बाद सिर्फ और सिर्फ मोक्ष ही है। इस कारण इन मूर्तियों को देखने के बाद भगवान की शरण में जाने की कल्पना की गई। 

4. कई लोगों का मानना है कि ये सब हिंदू धर्म की रक्षा करने के लिए बनाया गया है। ऐसा माना जाता है कि जब खजुराहो के मंदिरों का निर्माण हो रहा था, तब बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार तेजी से हो रहा था। उस समय चंदेल राजाओं ने हिंदू धर्म को बचाने के लिए मंदिर के बाहर नग्न मूर्तियों का निर्माण करवाया क्योंकि उस समय लोग सेक्स की तरफ आसानी से खींचे चले आते थे।

5. चंदेलों का मानना था कि लोग इन मूर्तियों को देखने के बहाने आएंगे और भगवान के दर्शन करेंगे, जिससे हिंदू धर्म को बढ़ावा मिलेगा।