Birthday special: तो इस फेमस फिल्म में सलमान खान की जगह होते पीयूष मिश्रा !

Birthday special: तो इस फेमस फिल्म में सलमान खान की जगह होते पीयूष मिश्रा !

Bhaskar Hindi
Update: 2020-01-12 12:21 GMT

डिजिटल डेस्क, मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री में पीयूष मिश्रा वो ना हैं, जिसके बार में जानने के लिए गूगल करने की जरूरत नहीं पड़ती है। पीयूष अपने काम की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। बड़े पर्दे पर उनकी उपस्तिथि लगातार बनी रहती है। अलग अंदाज़ की वजह से उनकी पहचान भी अलग सी बनी है। अभिनेता के अलावा उनकी पहचान लेखक, गायक और संगीतकार के तौर पर भी है। उनकी शायरी की प्रतिभा भी किसी से छिपी नहीं है। युवाओं के बीच पीयूष मिश्रा के टू-लाइनर बहुत फेमस हैं। 13 जनवरी 1963 में मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में जन्में पीयूष आज 57 वां जन्म दिन मना रहे हैं। आइए उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जीवन से जुड़े कुछ अहम पहलू...

 

8 वीं में लिखी थी पहली कविता
पीयूष ने पहली कविता तब लिखी जब वह 8वीं क्‍लास में थे। वह 2003 के आसपास मुंबई पहुंचे। उसके पहले करीब 20 साल का वक्‍त दिल्‍ली में गुजारा। इस दौरान उन्‍होंने काफी थिएटर किया। पीयूष ने नेशनल स्‍कूल ऑफ ड्रामा से 1986 में ग्रैजुएशन पूरा किया और फिर "ऐक्‍ट वन" नाम से उन्‍होंने थ‍िअटर ग्रुप शुरू किया। ग्रेजुएशन के बाद ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म "मैंने प्‍यार किया" में पीयूष को लीड ऐक्‍टर के तौर पर कास्‍ट किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद सूरज बड़जात्‍या ने सलमान खान को साइन कर लिया। इसके बाद पीयूष ने मणि रत्‍नम की "दिल से" से फिल्‍मी डेब्‍यू किया। इसमें उन्‍होंने एक सीबीआई इन्‍वेस्टिगेटिंग ऑफिसर का रोल प्‍ले किया था।
 

पीयूष मिश्रा के बारे में कहा जाता है कि वो फोन कम ही उठाते हैं।  इंटरव्यू देने से भी परहेज करते हैं। इसके पीछे की वजह उनके पास बोलने के लिए ज्यादा कुछ होता नहीं है। पीयूष बोर भी जल्दी हो जाते हैं, लेकिन अगर बात शेर-शायरी की होती है तो पीयूष घंटो कही भी गुजार देते हैं। पीयूष ने गुलाल फिल्म का फेमस गीत आरंभ है प्रचंड से लेकर गैंग्स ऑफ वासेपुर के आबरू तक कई गीते लिखे हैं। थिएटर की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पीयूष मिश्रा का नाम नहीं जानता हो। पीयूष को बचपन से ही सिंगिंग और एक्टिंग का शौक था। इस शौक ने उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचा दिया।पीयूष ने कई साल थिएटर शोज किए। वहीं अगर फिल्मी करियर के बारे में बात करें तो उन्हें पहला ब्रेक 1998 में रिलीज हुई शाहरुख खान की फिल्म "दिल से" मिला था। इस फिल्म में वह एक सीबीआई इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर की भूमिका अदा कर चुके है। 

 

कई फिल्मों में गाये गाने
पीयूष मिश्रा ने एक अभिनेता होने के साथ साथ काफी अच्छे गायक भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों में गीत गाये हैं। जिनमें मकबूल, गुलाल, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों शामिल है। पीयूष मिश्रा ने अपने कौशल और प्रतिभा से बॉलीवुड को सब कुछ दिया है। बॉलीवुड में "अरे रुक जा रे बंदे" जैसा गाना देने वाले भी पीयूष ही हैं। पीयूष ने ये गाना फिल्म "ब्लैक फ्राईडे" के लिए लिखा था। 

उनके द्वारा लिखी गई बेहतरीन लाईन
1. इंसान खुद की नजर में सही होना चाहिए, दुनिया तो भगवान से भी दुखी है।
2. अगर बेवफाओं के सिर पर सींग होते, तो मेरी वाली आज बारहसींघा होती।
3. कुर्सी है जनाजा तो नहीं। कुछ कर नहीं सकते तो उठ क्यों नहीं जाते?
4. कभी-कभी ऊपर वाला भी सोचता होगा, इतना तो मैं भी कभी नहीं लड़ा था जितना ये साले मेरे नाम पर लड़ रहे हैं।
5. रातों को चलती रहती हैं मोबाइल पे उंगलियां, सीने पे किताब रख के सोए काफी अरसा हो गया। 
6. एक छोटी सी गुजारिश है बंधु, अपने लेफ्ट और राईट के चक्कर में बस अपने देश को ना भूल जाना।
7. आज मैंने फिर जज्बात भेजे, आज तुमने फिर अल्फाज ही समझे।
8. कैसे करें हम खुद को तेरे प्यार के काबिल, जब हम आदतें बदलते हैं तुम शर्ते बदल देते हो।
9. मैं तुमसे अब कुछ नहीं मांगता ए खुदा। तेरी देकर छीन लेने की आदत मुझे मंजूर नहीं।
10. इंसान सिर्फ दो नस्ल के होते हैं। एक होते हैं हरामी और एक बेवकूफ। और सारा खेल इन दोनों का है।
11. सूकून मिलता है दो लफ्ज कागज पर उतार कर, चीख भी लेता हूं और आवाज भी नहीं होती।
12. दायरा हर बार बनाता हूं जिंदगी के लिए, लकीरें वहीं रहती हैं मैं खिसक जाता हूं।
13. वो काम भला क्या काम हुआ जिसमें साला दिल रो जाए, और वो इश्क भला क्या इश्क हुआ जो आसानी से हो जाए।
14. इलायची के दानों सा मुकद्दर है अपना। महक उतनी ही बिखरी, पीसे गए जितना।
15. दर्द की बारिशों में हम अकेले ही थे। जब बरसी खुशियां, ना जाने भीड़ कहां से आ गई।
16. शुक्र करो की हम दर्द सहते हैं लिखते नहीं, वरना कागजों पर लफ्जों के जनाजे उठते।
17. हल्की-फुल्की सी है जिंदगी, बोझ तो ख्वाहिशों का है।
18. औकात नहीं थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके। कम्बख्त इश्क में क्या गिरे मुफ्त में निलाम हो गए। 
19. एक इतवार ही है जो रिश्तों को संभालता है। बाकी दिन किश्तों को संभालने में खर्च हो जाते हैं।
20. गुस्सा आदमी से बहुत कुछ करवाता है, और ये जो लव है ना लव? ये सिर्फ मरवाता है।
 

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