Ganesh Chaturthi 2020: 126 वर्षों बाद गणेश चतुर्थी पर बन रहा है सूर्य मंगल का दुर्लभ योग, राशिफल से जानिए आपके लिए कैसा रहेगा गणेशोत्सव?

Ganesh Chaturthi 2020: 126 वर्षों बाद गणेश चतुर्थी पर बन रहा है सूर्य मंगल का दुर्लभ योग, राशिफल से जानिए आपके लिए कैसा रहेगा गणेशोत्सव?

Bhaskar Hindi
Update: 2020-08-20 13:22 GMT

डिजिटल डेस्क, भोपल। प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता श्री गणेश आज घर घर में विराजित होने जा रहे हैं और इसी के साथ शुरू हो गया है गणेशोत्सव। इस साल गणेश चतुर्थी पर सूर्य सिंह राशि में और मंगल मेष राशि में रहेगा। इस बार 126 साल बाद ऐसा हो रहा है जब गणेश उत्सव पर सूर्य और मंगल अपनी-अपनी स्वामित्व वाली राशि में रहेंगे और घर-घर गणपति विराजेंगे। गणेश उत्सव की शुरुआत में सूर्य-मंगल का ये योग 126 साल पहले बना था। पहली बार बालगंगाधर तिलक ने दस दिवसीय गणेश उत्सव सार्वजनिक रूप से मनाने की शुरुआत की थी। उस समय भी सूर्य अपनी सिंह राशि में और मंगल खुद की मेष राशि में स्थित था। 1893 से पहले पेशवा और भारतीय लोग अपने-अपने घरों में ही गणेश जन्मोत्सव मनाते थे। देशभर में इस त्योहार की तैयारियां शुरू हो चुकी है और बाजारों में भी सुंदर-सुंदर गणेश प्रतिमा नजर आने लगी हैं

गणपति जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन हुआ था और इस खास दिन को सनातन परंपरा के रूप में मनाया जाता है. सबसे खास बात यह है कि, 126 साल बाद चतुर्थी पर विशेष योग बन रहा है. तो चलिए जानते हैं कि इस बार शुभ-मुहूर्त क्या रहेगा और किस विधि से पूजा करने से सारे बिगड़े काम बनने लगेंगे. 

गणेश चतुर्थी शुभ-मुहूर्त
22 अगस्त दिन शनिवार से देशभर में गणपति उत्सव शरू हो जाएगा और इसकी शुभ तिथि या शुभ-मुहूर्त 21 अगस्त 2020 को रात्रि 11:02 बजे से प्रारंभ होकर 22 अगस्त 2020 को शाम 07:57 बजे तक रहेगा l

कैसे करें गणपति बप्पा की पूजा
परमपूजनीय गणपति बप्पा की पूजा का इस पर्व में बेहद खास महत्व है l वैसे तो गणपति बप्पा को बहुत ही सरलता से प्रसन्न किया जा सकता है l अगर पूजा में गणेश जी को सिर्फ दूर्वा अर्पित की जाए तो वह काफी प्रसन्न हो जाते हैं l और अपने भक्तों के सारे विघ्न दूर कर देते हैं l जिन लोगों पर गणेशजी की कृपा बरसती है उनके सारे बिगड़े काम पूरे होने लगते हैंl  ऐसी मान्यता है कि, गणेशजी का जन्म दोपहर में हुआ था इसलिए पूजा भी दोपहर के समय में ही करें l

भारत के लिए शुभ रहेंगे गणेश उत्सव के ये योग
•    इस बार गणेश उत्सव पर 4 ग्रह सूर्य सिंह राशि में, मंगल मेष में, गुरु धनु में और शनि मकर में रहेगा। ये चारों ग्रह अपनी-अपनी स्वामित्व वाली राशियों में रहेंगे। 
•    इन ग्रहयोगों में गणेश उत्सव की शुरुआत समूचे भारत के लिए शुभ रहने वाली है। 
•    सभी ग्रहों की अनुकूलता और स्वतंत्र भारत की राशि कर्क के लिए समय श्रेष्ठ रहेगा। गुरु धनु में होने से यह संयोग ओर भी बेहतर बनेगा। 
•    व्यापार उन्नति करेगा और विश्व में भारत का वर्चस्व बढ़ेगा। प्राकृतिक आपदाओं में कमी आएगी। 
•    आतंकवाद नियंत्रण में रहेगा। प्रजा के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा। 

पूजा विधि :-
गणेश चतुर्थी वाले दिन प्रातः स्नान आदि कर गणपति बप्पा के व्रत का संकल्प लें और दोपहर के वक्त उनकी प्रतिमा को चौकी पर लाल कपड़े के ऊपर स्थापित करें l इसके बाद गंगाजल छिड़कें और दोनों हाथ से गणेश जी का आह्वान करें और पूजा में पधारने में प्रेम पूर्वक अनुरोध करें l गणेश जी के माथे पर सिंदूर की टीका लगाकर उन्हें भोग में मोदक या लड्डू चढ़ाएं l फिर पुष्प, सिंदूर जनेऊ के साथ 21 दूर्वा के अर्पित करें l जिस समय आप उन्हें दूर्वा अर्पित करेंगे उस समय इन मंत्रों में से कोई एक मन्त्र पढ़े l

ॐ गणाधिपताय नमः
ॐ विघ्ननाशाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः 
ॐ सर्वसिद्धाय नमः 
ॐ एकदंताय नमः 
ॐ कुमार गुरवे नमः 
ॐ मूषक वाहनाय नमः 
ॐ उमा पुत्राय नमः 
ॐ विनायकाय नमः 
ॐ इषक्त्राय नमः  

 

इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए दो दूर्वा चढ़ाते जाएं इस तरह कुल बीस दूर्वा अर्पित हो जाएंगी और 21वीं दूर्वा चढ़ाते हुए फिर से मंत्रों को एक साथ दोहराएं और चरणों में अर्पित कर दें l इसके बाद उन्हें प्रिय भोग मोदक या लड्डू भी इसी प्रकार चढ़ाएं l  फिर देखिए कैसे आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे l

अब जानिए सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा गणेश उत्सव

मेष- इस राशि के लोगों को लाभ प्राप्त होंगे। घर-परिवार में खुशियां बनी रहेंगी। संतान से सहयोग मिलेगा। गणेश चतुर्थी बहुत ही फलदायी रहेगी l जातकों को संतान पक्ष की तरफ से अच्छी खबर मिल सकती है l

वृषभ- विवादों में विजय मिलेगी और गणेशजी के सेवा करने से कोई अटका हुआ काम अवश्य पूरा होगा। मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा। सारे अधूरे और अटके काम पूरे होंगे और लंबे समय से जारी विवादों का भी अंत होगा l

मिथुन- घर और बाहर सभी जगहों पर सम्मान प्राप्त होगा। जिम्मेदारियों में वृद्धि होगी और धन की प्राप्ति सुगम होगी। जोखिमपूर्ण निवेश और काम नहीं करें। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और समाज में मान-सम्मान भी बढ़ेगा l

कर्क- आधुनिक सुख सुविधाओं को प्राप्त करेंगे और किसी बड़े काम के बन से जाने से सुख प्राप्त होगा। विवाह प्रस्ताव मिलेंगे। बहुत दिनों से अगर किसी बड़े काम के बारे में विचार कर रहे हैं तो बहुत जल्द पूर्ण होगा और परिवार तथा जीवन में सुख व शांति बढ़ेगी l

सिंह- सोचे हुए काम बनेंगे। कोई विशेष उपलब्धि प्राप्त होगी। विदेश जाने की इच्छा रखने वालों को सफलता मिलेगी। गणेशजी से सच्ची मन से आराधना करने से विदेश यात्रा का सपना सच हो सकता है l

कन्या- खोए हुए धन एवं नुकसान की पूर्ति हो सकती है। धार्मिक यात्रा का योग बनेगा और किसी बड़े आय देने वाले कार्य की स्थापना होगी। जो भी प्रयास करेंगे उन कार्यों में सफलता जरूर मिलेगी. कोई बड़ा काम शुरू होने के संकेत नजर आ रहे हैं l

तुला- यह राशि खराब दौर से गुजर रही थी, लेकिन गणेश चतुर्थी के दिन से राशियों का अच्छा समय शुरू हो रहा है। प्रसन्नतादायक समाचार की प्राप्ति होगी और संतान से सुख मिलेगा। और संतान पक्ष की तरफ से सुख मिलेगा l

वृश्चिक- गणेशजी उत्सव के अंतिम दिनों में कोई बड़ी खुशखबरी प्राप्त होगी। जमीन संबंधी लाभ होने की संभावना है। धन की समस्या भी दूर होगी। अच्छा समय शुरू हो रहा हे l

धनु- नुकसान पहुंचाने वालों को खोजने में सफल होंगे और शत्रुओं का नाश करने में सफल होंगे। जीवन साथी से प्रसन्नता प्राप्त होगी। सम्मान मिलेगा। जीवनसाथी की ओर से सहयोग और सम्मान मिलेगा l इसके अतिरिक्त परिवार में भी मधुरता आएगी l

मकर- यह समय अच्छा रहेगा और कीर्ति में वृद्धि होगी। नए वस्त्र-आभूषणों की प्राप्ति होगी। योजनाएं सफल होंगी। इस दिन से आपका अच्छा समय प्रारम्भ होने वाला है l

कुंभ- गणेश चतुर्थी के दिन से कुंभ राशि के जातकों को कोई अच्छा समाचार मिल सकता है और यात्रा के योग भी बन रहे हैं l शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी और संतान भी अनुकूल रहेगी। परन्तु यात्रा में कष्ट हो सकता है। धार्मिक कार्य करने का अवसर प्राप्त होता ।

मीन- गणेश चतुर्थी खासतौर से नौकरीपेशा वाले लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और बाकी लोगों के लिए भी शुभ होगी l गणेशजी और लक्ष्मीजी का आशीर्वाद प्राप्त होगा। किसी भी क्रय-विक्रय को सहज न लें मन लगाकर काम करने पर निश्चित ही लाभ प्राप्त होगा।


ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखार्विंद
विनोद सोनी पोद्दार

 

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