कंगना को नहीं लगता अलोचनाओं से डर, कहा- यह हर कलाकार के जीवन का हिस्सा

कंगना को नहीं लगता अलोचनाओं से डर, कहा- यह हर कलाकार के जीवन का हिस्सा

IANS News
Update: 2019-09-15 07:30 GMT
कंगना को नहीं लगता अलोचनाओं से डर, कहा- यह हर कलाकार के जीवन का हिस्सा

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। बॉलीवुड में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत का मानना है कि जब तक उनकी नीयत सही है, तब तक उन्हें अपने द्वारा कही गई बातों का बुरा नहीं लगता। कंगना ने आईएएनएस से कहा कि मैं जब भी किसी बुराई के खिलाफ कुछ कहती हूं, तो मैं हमेशा इस बात को देखती हूं कि मेरा इरादा क्या है।

उन्होंने कहा कि आलोचना मुझे कड़वा नहीं बनाती है। नेपोटिज्म, यौन शोषण, असमानता प्रेरित भुगतान और सभी प्रकार का बुरा व्यवहार जो कि एक बाहरी व्यक्ति को बॉलीवुड में सहना पड़ता है। जब भी मैंने इसे लेकर बात की है और नाम उजागर किए हैं, ये सभी बातें मेरे करियर के खिलाफ गईं। लेकिन कोई भी इन बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

कंगना उस वक्त विवादों में घिर गई थीं, जब उन्होंने मशहूर फिल्म निर्माता करण जौहर को उन्हीं के टेलीविजन चैट शो में कहा था कि वे ही नेपोटिज्म के ध्वजवाहक हैं। उन्होंने कहा कि आज लोग नेपोटिज्म के बारे में बात कर रहे हैं। इस बारे में उनकी अपनी राय है। लेकिन क्या पहले कभी किसी ने इस बारे में बात की थी? मेरे लिए बड़े लक्ष्य मायने रखते हैं। जिन मुद्दों को सालों से दबाकर रखा गया था लोग अब उस बारे में बात कर रहे हैं।

फिल्म जजमेंटल है क्या के एक प्रमोशन इवेंट के दौरान एक पत्रकार से उनकी कहासुनी हो गई थी, और इसको लेकर भी उनकी काफी आलोचना हुई थी। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनके द्वारा किए गए कई अच्छे कार्यो की सराहना भी की है। उन्होंने कहा कि वह आलोचना को दिल पर लगाकर नहीं बैठतीं।

कंगना ने कहा कि एक कलाकार के रूप में काम को लेकर मैं आलोचना सुनने के लिए तैयार रहती हूं। इसे लेकर मेरे दिल में किसी के लिए कोई बात नहीं है। लेकिन मैंने समाज के लिए कई कार्य किए हैं। जैसे पौधे लगाना, पर्यावरण को बचाना, नदियों के बारे में बात करना, प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ बात करना और जब कोई इन बातों का मजाक बनाएगा तो इसे मैं बिल्कुल सहन नहीं करूंगी।


 

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