Coronavirus Vaccine : फाइजर का दावा, उनकी कोरोना वैक्सीन ट्रायल में 90 प्रतिशत कारगर

Coronavirus Vaccine : फाइजर का दावा, उनकी कोरोना वैक्सीन ट्रायल में 90 प्रतिशत कारगर

Bhaskar Hindi
Update: 2020-11-09 16:00 GMT
Coronavirus Vaccine : फाइजर का दावा, उनकी कोरोना वैक्सीन ट्रायल में 90 प्रतिशत कारगर
हाईलाइट
  • फाइजर की कोरोना वैक्सीन से 90 फ़ीसद संक्रमण के ठीक होने का दावा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर (Pfizer) और उसकी जर्मनी की पार्टनर कंपनी बायोनटेक एसई (BioNTech SE) ने कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल में 90 फीसदी प्रभावी होने का दावा किया है। कंपनियों ने सोमवार को इसकी घोषणा की। फाइजर के अध्यक्ष और सीईओ डॉ अल्बर्ट बोरला ने कहा कि यह विज्ञान और मानवता के लिए बड़ा दिन है। तीसरे चरण के ट्रायल के परिणामों के पहले सेट से यह स्पष्ट होने लगा है कि कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी वैक्सीन कारगर है। हम वैक्सीन तलाशने में नया आयाम स्थापित कर रहे हैं। यह समय ऐसा है जब कोरोना वायरस वैक्सीन की जरूरत पूरे विश्व को है।

फाइजर और बायोनटेक पहली ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने वैक्सीन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और सफल परिणाम का आंकड़ा पेश किया है। कंपनियों ने कहा कि उन्हें अब तक कोई गंभीर सुरक्षा चिंता दिखाई नहीं दी है। कंपनी ने कहा कि उसकी वैक्सीन ट्रायल के दौरान 94 संक्रमितों में 90 प्रतिशत कारगर पाई गई है। अगर बाकी डेटा भी यह संकेत देते हैं कि वैक्सीन सेफ है तो इस महीने के खत्म होने से पहले ही कंपनी हेल्थ रेग्युलेटर्स से वैक्सीन को बेचने की इजाजत के लिए आवेदन करेगी। फ़ाइज़र को उम्मीद है कि वो इस साल के अंत तक इस वैक्सीन के पांच करोड़ डोज़ उपलब्ध करा सकेगी और साल 2021 के अंत तक 1.3 अरब डोज़ तैयार हो सकेंगे।

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन शरीर में एंटीबॉडी बनाती है और इम्यून सिस्टम के एक और हिस्से टी-सेल का निर्माण करती है। प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, दूसरी खुराक के सात दिन बाद और पहली खुराक के 28 दिनों के बाद रोगियों में वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है। हालांकि अभी इस बात को लेकर सवाल हैं कि प्रतिरोधक क्षमता का असर कब तक रहेगा और अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों पर इसका असर क्या होगा? कंपनी ने इस बारे में अभी जानकारी नहीं दी है। समय बचाने के लिए, कंपनियों ने वैक्सीन प्रभावी होगी या नहीं यह पता चलने से पहले ही वैक्सीन का निर्माण शुरू कर दिया है।

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