चीन की मांग पर कश्मीर मुद्दे पर आज UNSC में 'बंद कमरे' में होगी चर्चा

चीन की मांग पर कश्मीर मुद्दे पर आज UNSC में 'बंद कमरे' में होगी चर्चा

Bhaskar Hindi
Update: 2019-08-16 03:27 GMT
चीन की मांग पर कश्मीर मुद्दे पर आज UNSC में 'बंद कमरे' में होगी चर्चा
हाईलाइट
  • अनुच्छेद 370 के हटने से बौखलाए पाकिस्तान को मिला चीन का सहारा 
  • चीन ने अनुच्छेद 370 पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की क्लोज डोर बैठक बुलाने की मांग की थी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) वापस लेने के भारत के फैसले पर आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद "बंद कमरे" में चर्चा करेगी। दरअसल कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने से बौखलाए पाकिस्तान को मुस्लिम राष्ट्रों समेत पूरी दुनिया ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान को भाव नहीं दिया, लेकिन चीन अपनी चाल चलते हुए भारत के खिलाफ पाकिस्तान के साथ खड़ा हो गया। चीन ने अनुच्छेद 370 पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद दरवाजे (क्लोज डोर) में बैठक बुलाने की मांग की थी। चीन की मांग पर ही शुक्रवार को "बंद कमरे" में चर्चा होगी।  

जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष पोलैंड ने इस मुद्दे को चर्चा के लिए शुक्रवार सुबह 10 बजे का समय दिया है। सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा अपने आप में अहम मामला है। पिछली बार 1965 में इस मसले पर सुरक्षा परिषद की पूर्ण बैठक में चर्चा हुई थी। आज होने वाली बैठक पूर्ण बैठक नहीं मानी जा रही है, बल्कि इसे बंद कमरे में चर्चा का नाम दिया जा रहा है। चीन से पहले पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन ओपन  डोर बैठक बुलाने की मांग की थी, जिसको अनसुना कर दिया गया था।

आपको बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रोविजनल रूल्स ऑफ प्रोसीजर के नियम 55 में बंद दरवाजे में प्राइवेट मीटिंग का प्रावधान है। यह बैठक पूरी तरह से गोपनीय होती है। इसमें सिर्फ सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य ही हिस्सा लेते हैं। इस बैठक में उन देशों को भी हिस्सा नहीं लेने दिया जाता है, जिनसे संबंधित मुद्दा होता है।

बंद दरवाजे में होने वाली बैठक में सुरक्षा परिषद के सदस्यों द्वारा दिए जाने वाले बयानों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है, न ही बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। लिहाजा बैठक में होने वाली चर्चा सार्वजनिक नहीं हो पाती और यह पता नहीं चल पाता कि बैठक में जिस मुद्दे पर चर्चा हुई उस पर किस देश ने किसके पक्ष में या खिलाफ क्या बयान दिया।

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