कमर्शियल वाहन: Ashok Leyland ने लॉन्च किए Dost और Dost+ XL के ट्विन फ्यूल वेरिएंट, जानिए कीमत और फीचर्स

Ashok Leyland ने लॉन्च किए Dost और Dost+ XL के ट्विन फ्यूल वेरिएंट, जानिए कीमत और फीचर्स
Dost के ट्विन-फ्यूल वेरिएंट की पेलोड क्षमता 1,218 kg है और इसकी दावा की गई रेंज लगभग 400 km है। इसमें 120-लीटर का CNG टैंक और 5-लीटर का पेट्रोल बैकअप टैंक लगा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदुजा ग्रुप की प्रमुख भारतीय कंपनी अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) ने अपने दो नए कमर्शियल वाहन दोस्त (Ashok Leyland Dost) और दोस्त+ एक्सएल (Ashok Leyland Dost+ XL) के ट्विन-फ्यूल वेरिएंट लॉन्च किए हैं। ये नए मॉडल कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और पेट्रोल, दोनों से चलते हैं। इससे ड्राइवर जरूरत और उपलब्धता के हिसाब से फ्यूल बदल सकते हैं। बात करें कीमत की तो, DOST ट्विन फ्यूल की शुरुआती एक्स शोरूम प्राइस 8.20 लाख रुपए रखी गई है। वहीं DOST+ XL ट्विन फ्यूल की शुरुआती एक्स शोरूम प्राइस 8.75 लाख रुपए तय की गई है।

Ashok Leyland Dost और Dost+ XL की खूबियां

सबसे पहले बात करें इनके डायमेंशन की तो Dost+ XL में 4,770 मिमी लंबाई, 1,670 मिमी चौड़ाई और 1,930 मिमी ऊंचाई है, जबकि इसका व्हीलबेस 2,510 मिमी है। इसमें 2,805 मिमी लंबा लोड बॉडी दिया गया है, जिससे कार्गो क्षमता बेहतर होती है। अन्य फीचर्स में पावर स्टीयरिंग, 5,900 मिमी टर्निंग रेडियस और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया केबिन शामिल है।

Dost के ट्विन-फ्यूल वेरिएंट की पेलोड क्षमता 1,218 kg है और इसकी दावा की गई रेंज लगभग 400 km है। इसमें 120-लीटर का CNG टैंक और 5-लीटर का पेट्रोल बैकअप टैंक लगा है। जबकि, Dost+ XL का बड़ा वेरिएंट 1,410 kg की पेलोड क्षमता, 148-लीटर के CNG टैंक और उतने ही पेट्रोल रिजर्व के साथ आता है। इसकी दावा की गई रेंज 500 km तक है।

अशोक लेलैंड में एलसीवी, आईओ, डिफेंस और पावर सॉल्यूशंस के प्रेजिडेंट अमनदीप सिंह ने कहा, "ये वाहन ऑपरेटरों को ज्यादा साफ और पर्यावरण के अनुकूल CNG मोड में गाड़ी चलाने और जरूरत पड़ने पर पेट्रोल को बैकअप फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करने की सुविधा देते हैं। इससे कुल मिलाकर ऑपरेटिंग लागत कम होती है और उत्सर्जन भी घटता है।"

Ashok Leyland में LCV Business के हेड, Viplav Shah ने कहा, "ये वाहन इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि CNG पर चलकर लागत बचाते हैं और पेट्रोल पर चलकर ज्यादा दूरी तय करते हैं। इससे फ्यूल की चिंता खत्म हो जाती है। साथ ही, ये कम उत्सर्जन करते हैं, जिससे कार्बन फुटप्रिंट भी कम होता है।"

Created On :   16 April 2026 10:00 PM IST

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