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Mumbai: 92 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में EOW ने एक प्रॉपर्टी कंसलटेंट को अरेस्ट किया

Mumbai: 92 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में EOW ने एक प्रॉपर्टी कंसलटेंट को अरेस्ट किया

हाईलाइट

  • माटुंगा का एक 60 वर्षीय प्रॉपर्टी कंसलटेंट गिरफ्तार
  • ईओडब्ल्यू अब प्रॉपर्टी कंसलटेंट के साथियों की तलाश में

डिजिटल डेस्क, मुंबई। माटुंगा के एक 60 वर्षीय प्रॉपर्टी कंसलटेंट को पुलिस ने 92 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल लीजिंग कंपनी को धोखा देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (ईओडब्ल्यू) ने इस प्रॉपर्टी कंसलटेंट को गिरफ्तार किया है। इसका नाम रमेश हीरजी घरोड़ है। ईओडब्ल्यू अब घरोड़ के साथियों की तलाश कर रही है।

इस मामले में शिकायतकर्ता, एंकर ग्रुप और गुड वैल्यू फाइनेंशियल सर्विसेज और एजेएस डेवलपर्स, विले पार्ले में मनीषा को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी का रिडेवलपमेंट कर रहे थे, जिसके लिए उन्हें फंड्स की जरूरत थी। 2010 में, गुड वैल्यू और प्रमदा ऑयल और एजेएस डेवलपर्स के बीच एक पार्टनरशिप डीज एग्रीमेंट हुआ था। गुड वैल्यू और प्रमदा ऑइल आवास परियोजना के लिए एजेएस इम्पेक्स को फाइनेंस करना था और मुनाफे का 60% हिस्सा लेना था।

2013 के मॉर्डगेज डीड के अनुसार, एजेएस डेवलपर्स ने आठ फ्लैटों के लिए आवंटन पत्र जारी किए। डीड में, लीजिंग कंपनी को मॉर्टगेज में  आठ फ्लैटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 11,116 वर्ग फुट था। पुलिस ने कहा कि 2012-2013 के लिए, AJS डेवलपर्स को 22.3 करोड़ रुपये गुड वैल्यू और 19.7 करोड़ रुपये एंकर लीजिंग कंपनी को देने थे।

पुलिस ने फिर प्रोजेक्ट के बारे में और जानकारी कलेक्ट की और पाया कि एजेएस डेवलपर्स ने 2011 में आईओडी और अन्य अनुमतियां ली थीं और 2016 तक 12 मंजिला इमारत का निर्माण किया। कुछ उल्लंघनों के कारण BMC ने व्यावसायिक प्रमाणपत्र (OC) नहीं दिया था।

एक अधिकारी ने कहा, जब हमने रजिस्ट्रेशन ऑफिस में इंक्वायरी की, तो हमने पाया कि विसंगतियां पाईं। एजेएस डेवलपर्स ने मॉर्टगेज डीड में फाइनेंशिल लीजिंग कंपनी को जो प्रॉमिस किया जो एक्चुअल प्लान सबमिट किया वो अलग थे। मॉर्टगेज की डीड में, AJS ने 11,116 वर्ग फुट का उल्लेख किया था, लेकिन पंजीकरण कार्यालय के अनुसार स्वीकृत कुल क्षेत्रफल 6,509 वर्ग फीट था।

AJS ने शिकायतकर्ता कंपनी को फर्जी आवंटन पत्र जारी किए थे, जो चुकाने में विफल रही, उसने ब्याज नहीं दिया और 92 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।