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वित्तमंत्री ने कर्मचारियों के लिए एलटीसी कैश वाउचर की घोषणा की

October 12th, 2020 17:00 IST
 वित्तमंत्री ने कर्मचारियों के लिए एलटीसी कैश वाउचर की घोषणा की

हाईलाइट

  • वित्तमंत्री ने कर्मचारियों के लिए एलटीसी कैश वाउचर की घोषणा की

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को सरकारी कर्मचारियों और राज्य द्वारा संचालित संगठनों के कर्मचारियों के लिए अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में नकद वाउचर देने की घोषणा की है।

सीतारमण ने कहा कि इस योजना से लगभग 28,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उपभोक्ता मांग पैदा होगी।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चार साल के अंतराल में एलटीसी मिलता है। इसमें एक भारत में कहीं भी यात्रा के लिए और एक गृह नगर (होम टाउन) या दो होम टाउन यात्राओं के लिए एलटीसी मिलता है। वेतन या पात्रता के अनुसार हवाई या रेल किराया की सरकार की ओर से प्रतिपूर्ति की जाती है और 10 दिनों (वेतन और महंगाई भत्ता) के अतिरिक्त अवकाश नकदीकरण में भी भुगतान किया जाता है।

कोविड-19 के कारण, कर्मचारी 2018-21 के वर्तमान ब्लॉक में एलटीसी का लाभ उठाने की स्थिति में नहीं हैं।

इसलिए सरकार ने अवकाश नकदीकरण (लीव इन्कैशमेंट) पर पूर्ण नकद भुगतान करने का फैसला किया है और तीन फ्लैट-दर वाले स्लैब में किराये का भुगतान पात्रता के आधार पर किया गया है, जिसमें किराया भुगतान को कर मुक्त बनाना शामिल है।

एलटीसी नकदी का इस्तेमाल 31 मार्च, 2021 से पूर्व सामानों की खरीद, यात्रा टिकट के तीन गुना के बराबर एसवीसीएस के लिए किया जा सकेगा। वहीं, वे एक बार लीव इन्कैशमेंट का लाभ भी उठा सकते हैं।

कर्मचारी इन वाउचर का इस्तेमाल ऐसे उत्पाद खरीदने के लिए कर सकते हैं, जिन पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत या अधिक है।

सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से कर्मचारियों के लिए इस साल यात्रा करना मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने उन्हें नकद वाउचर देने का फैसला किया है। इसे 31 मार्च, 2021 तक खर्च करना होगा। एलटीसी के लिए सरकार 5,675 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों तथा बैंकों को 1,900 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

वित्तमंत्री ने कहा कि इस कदम से 19,000 करोड़ रुपये की मांग पैदा होगी। अगर आधे राज्यों ने इस दिशानिर्देश का पालन किया तो 9,000 करोड़ रुपये की मांग और पैदा होगी।

एकेके/एसजीके

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