comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने सरकार के सुधार कार्यक्रमों पर मुहर लगाई

June 12th, 2020 00:00 IST
 वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने सरकार के सुधार कार्यक्रमों पर मुहर लगाई

हाईलाइट

  • वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने सरकार के सुधार कार्यक्रमों पर मुहर लगाई

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने गुरुवार को कहा है कि एक प्रमुख वैश्विक क्रेडिट एजेंसी द्वारा पेश किया गया भारत का विकास परिदृश्य मोदी सरकार के संरचनात्मक सुधार कार्यक्रम को सत्यापित करता है।

सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम ने एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एसएंडपी ने अगले साल के लिए 8.5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया है, जो केंद्र द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों पर आधारित है।

सुब्रह्मण्यम ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब एक दिन पहले एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत के सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग्स को बरकरार रखा और उसे दीर्घकाल में बीबीबी- और अल्पकाल में ए-3 अयाचित विदेशी और स्थानी मुद्रा रेटिंग्स दी।

इसके अलावा एजेंसी ने कहा कि दीर्घकालिक रेटिंग पर भारत का परिदृश्य स्थिर है।

इसी तरह फिच ने एपीएसी सॉवरेन क्रेडिट ओवरव्यू 2020 में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 9.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया है।

सुब्रह्मण्यम ने कहा, उन्होंने खासतौर से सुधार के कदमों के बारे में जिक्र किया है..जिन सुधारों को आत्मनिर्भर भारत पैकेज में शामिल किया गया है, उनका भी जिक्र किया गया है। इन्हीं उपायों की पृष्ठभूमि के आधार पर एसएंडपी ने अगले वित्त वर्ष के लिए 8.5 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान लगाया है और यह संरचनात्मक सुधारों पर जोर देने पर आधारित है, जिसे पैकेज में किया गया है।

उन्होंने कहा, इस बात को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि फिच ने एपीएसी देशों की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें उन्होंने अगले साल का वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत अनुमानित किया। दोनों एजेंसियों ने माना है कि इस साल वृद्धि निराशाजनक होगी।

दोनों एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी में पांच प्रतिशत संकुचन का अनुमान जताया है।

उन्होंने कहा, इस तरह कुल मिलाकार रेटिंग बनी हुई है और परिदृश्य स्थिर है, जो कि अच्छी खबर है, खासतौर से इस साल बजट में किए गए प्रस्तावों के परिप्रेक्ष्य से।

सुब्रह्मण्यम ने कहा, यह हमारे लिए इस कदम के साथ आगे बढ़ने का रास्ता साफ करता है।

कमेंट करें
8Xm0C
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।