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चीन से विद्युत उपकरण आयात रोकने सरकार खड़ी करेगी टैरिफ, नॉन-टैरिफ अवरोधक

June 24th, 2020 22:30 IST
 चीन से विद्युत उपकरण आयात रोकने सरकार खड़ी करेगी टैरिफ, नॉन-टैरिफ अवरोधक

हाईलाइट

  • चीन से विद्युत उपकरण आयात रोकने सरकार खड़ी करेगी टैरिफ, नॉन-टैरिफ अवरोधक

नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। सरकार संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विद्युत सेक्टर में आयात पर रोक लगाने के लिए विभिन्न टैरिफ और नॉन-टैरिफ अवरोध खड़े करने का प्रस्ताव ला रही है। इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर विदेशी उपकरणों की मौजूदगी है, खासतौर से चीन जैसे देशों से।

सरकार के जानकार सूत्रों ने कहा है कि विद्युत मंत्रालय ने विद्युत उपकरण आयात से जुड़े नियमों में कई सारे बदलावों के प्रस्ताव किए हैं, जिन्हें सरकार वाणिज्य और वित्त मंत्रालयों के साथ बातचीत के बाद स्वीकार कर उसे लागू कर सकती है।

इन प्रस्तावों में विद्युत मंत्रालय ने सभी तरह के विद्युत उपकरणों के लिए सख्त गुणवत्ता मानक तय करने का सुझाव दिया है और घटिया गुणवत्ता वाले उपकरणों को खारिज कर दिया जाएगा और आपूर्तिकर्ता को काली सूची में डाल दिया जाएगा। आयातित सामानों की भारतीय मानक की कसौटी पर भारतीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाएगी और उसे परखा जाएगा कि उसमें कोई मैलवेयर तो नहीं हैं।

इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी सुझाव दिया है कि सौर बैटरियों और मॉड्यूल के आयात पर एक अगस्त से 20 प्रतिशत की दर से बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) लागू की जाए। मौजूदा समय में लागू 15 प्रतिशत सेफगार्ड ड्यूटी की मियाद एक अगस्त को समाप्त हो जाएगी। इस कदम से चीन से सोलर गियर के आयात के रास्ते में अवरोध पैदा हो सकता है, जो भारत को लगभग 80 प्रतिशत सौर बैटरी और मॉड्यूल की आपूर्ति करता है।

विद्युत सेक्टर में मंत्रालय स्तर पर एक और अवरोध खड़ा करने की योजना है, जो पहले सभी आयात प्रस्तावों को मंजूरी देगा। यानी संबंधित देशों से उपकरणों को आयात किए जाने से पहले विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों से मंजूरी लेनी होगी।

इसके साथ ही नवीकरणीय सेक्टर में खास सामानों के आयात के लिए छूट के कस्टम सर्टिफिकेट जारी करने की परंपरा को एक निश्चित तिथि से बंद की जाएगी। इससे आयातकों को उपकरणों के लिए देश के अंदर संभावना तलाशने की प्रेरणा मिलेगी। इस कदम से सरकार के आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को मदद मिलेगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के फायनेंसरों, पॉवर फायनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन और इंडियन रिन्यूवेबल इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (आईआरईडीए) को भी कहा गया है कि वे अपनी फायनेंसिंग को इस तरह आकार दें कि जो डेवलपर घरेलू स्तर पर विनिर्मित उपकरणों का इस्तेमाल करें, उनसे कम दर पर ब्याज लिया जाए।

अन्य अवरोधों के प्रस्ताव उपकरण मॉडल्स और विनिर्माताओं की एक स्वीकृत सूची के अनुसरण के जरिए किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यह सूची एक अक्टूबर, 2020 से प्रभावी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मानक बिडिंग गाइडलाइंस के अनुरूप जिन सभी विद्युत परियोजनाओं को बिड आउट किया गया है उन्हें सौर बैटरियां और सौर मॉड्यूल्स और अन्य उपकरण स्वीकृत सूची में शामिल विनिर्माताओं से ही खरीदने होंगे।

यद्यपि विद्युत क्षेत्र में कई सारे देशों से आयात होता है, लेकिन चीन बड़े और छोटे दोनों उपकरणों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में इसकी उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक है।

विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादन और पारेषण परियोजनाओं के डेवलपर्स के साथ एक बैठक में मंत्री आर.के. सिंह ने उन्हें एक संकल्प दिलाया कि वे उस तरह के कोई उपकरण, सामग्री और सामना का आयात नहीं करेंगे, जो पर्याप्त मात्रा में देश में मौजूद हैं।

सिंह ने डेवलपर्स से यह भी कहा कि जो सामान और सेवाएं घरेलू स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं, और उनका आयात जरूरी है, उन्हें भी दो-तीन साल की अवधि तक ही आयात किया जाए और इस दौरान इन सामानों को घरेलू स्तर पर विनिर्मित करने की सुविधा खड़ी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार एक नीति तैयार करेगी और प्रोत्साहन देगी, ताकि अगले दो-तीन सालों में ये सभी वस्तुएं घरेलू स्तर पर विनिर्मित होने लगें।

सिंह ने कहा कि मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने और आयात की निर्भरता घटाने के लिए यह जरूरी है कि पारेषण, तापीय, हाइड्रो, वितरण, नवीकरणीय सामनों के क्षेत्र के डेवलपर्स आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ें और पूरे दिल से मेक इन इंडिया नीति को अपनाएं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।