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Wholesale inflation: खाद्य वस्तुओं के दाम घटने से घटी थोक महंगाई दर, दिसंबर में WPI 1.22% पर

January 14th, 2021 18:13 IST
Wholesale inflation: खाद्य वस्तुओं के दाम घटने से घटी थोक महंगाई दर, दिसंबर में WPI 1.22% पर

हाईलाइट

  • दिसंबर में थोक महंगाई घटकर 1.22% पर
  • फूड आइटम्स का दाम कम होने से राहत

मुंबई। थोक महंगाई दर के दिसंबर माह के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए। खाद्य वस्तुओं के दाम घटने से दिसंबर 2020 में थोक महंगाई दर (WPI) घटकर 1.22 फीसदी पर आ गई है। नवंबर 2020 में यह 1.55 फीसदी पर थी। जबकि दिसंबर 2019 में यह 2.76 फीसदी दर्ज की गई थी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार महीने दर महीने के आधार पर प्राइमरी आर्टिकल्स इंफ्लेशन 2.72% के मुकाबले घटकर 1.61% हो गया है। फ्यूल एंड पावर इंफ्लेशन -9.87% से बढ़कर -8.72% हो गया है। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट इंफ्लेशन 2.97% के मुकाबले बढ़कर 4.24% हो गई है।

क्या होता है WPI इंडेक्स?
बता दें कि WPI की रेट बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के की थोक कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई को दर्शाती हैं। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की गणना थोक बाजार में उत्पादकों और बड़े व्यापारियों के किये गए भुगतान के आधार पर की जाती है। इसमें उत्पादन के प्रथम चरण में अदा किये गए मूल्यों की गणना की जाती है। भारत में मुद्रा स्फीति की गणना इसी सूचकांक के आधार पर की जाती है।

खुदरा महंगाई दर में भी गिरावट
इससे पहले खुदरा महंगाई दर के भी आंकड़े जारी किए गए थे। फूड प्रोडक्ट की घटी कीमतों के कारण दिसंबर में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के  6.93% से घटकर 4.59% हो गई। फूड प्रोडक्ट की महंगाई दर नवंबर में 9.43% थी जो दिसंबर में घटकर 3.41% हो गई। वहीं अर्थव्यवस्था के एक अन्य प्रमुख बैरोमीटर, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन निगेटिव जोन में है। नवंबर में इसमें 1.9 प्रतिशत का कॉन्ट्रेक्शन आया है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टरों का लोअर आउटपुट है। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।