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धनतेरस पर देशभर में लोगों ने खरीदा 20,000 करोड़ रुपये का सोना : आईबीजेए

November 13th, 2020 20:00 IST
 धनतेरस पर देशभर में लोगों ने खरीदा 20,000 करोड़ रुपये का सोना : आईबीजेए

हाईलाइट

  • धनतेरस पर देशभर में लोगों ने खरीदा 20,000 करोड़ रुपये का सोना : आईबीजेए

मुंबई, 13 नवंबर (आईएएनएस)। धनतेरस के शुभ मुहूर्त पर इस साल सोने की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी से ज्यादा हुई है। आंकड़ों की बात करें तो लोगों ने करीब 20,000 करोड़ रुपये का सोना इस साल धनतेरस पर खरीदा है। यह आंकड़ा इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) से मिला है।

आईबीजेए के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में इस साल धनतेरस पर सोने की बिक्री करीब 40 टन हुई है, जिसका मूल्य करीब 20,000 करोड़ रुपये आंका जा रहा है।

आईबीजेए के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने आईएएनएस को बताया कि पिछले साल जहां तकरीबन 12,000 करोड़ रुपये का सोना बिका था, वहीं इस साल 20,000 करोड़ रुपये का बिका है।

मेहता ने बताया, पिछले साल जहां करीब 30 टन सोना बिका था, वहां इस साल करीब 40 टन सोना बिका है।

उन्होंने कहा कि सोने की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले परिमाण में जहां 30 से 35 फीसदी का इजाफा हुआ है, वहीं मूल्य में करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

मेहता ने कहा कि इस बार धनतेरस पर सोने की बिक्री बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बीते आठ महीने से आभूषणों की खरीद में कमी रही है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान लोग सोन के आभूषण नहीं खरीद पाए क्योंकि बाजार बंद था और बाजार जब खुला भी तो शादी का सीजन मंदा रहा, लेकिन आगे शादी का सीजन भी है और धनतेरस सोने-चांदी की खरीदारी का शुभमुहरूत का लोगों ने इंतजार भी किया।

उन्होंने बताया कि इस बीच सोने का भाव 56,000 रुपये की ऊंचाई को छूने के बाद घट गया है और कोरोना के कारण आगे पीली तेजी की संभावना है, जिससे सोने की खरीदारी के प्रति लोगों का रुझान बना हुआ है। मेहता ने कहा कि ज्वेलर्स ने इस बार काफी लुभावने ऑफर भी दिए जिससे सोने और चांदी की खरीदारी के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि इस साल धनतेरस देश में दो दिन मनाया गया, कुछ जगहों पर लोगों ने गुरुवार को ही मनाया, जिससे लोगों को खरीद के लिए ज्यादा समय मिला।

आईबीजेए के अनुसार, शुक्रवार को देशभर में हाजिर बाजार में 24 कैरट शुद्धता के सोने का औसत भाव 50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम (बिना जीएसटी) रहा, जोकि एक दिन पहले भाव 50,702 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, 22 कैरट शुद्धता के सोने का औसत भाव 50,645 रुपये प्रति 10 ग्राम था जोकि एक दिन पहले 50,499 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी का औसत भाव 62,700 रुपये प्रति किलो था, जोकि पिछले सत्र में 62,797 रुपये प्रति किलो था।

देश के सबसे बड़े वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शाम 6.42 बजे सोने का दिसंबर एक्सपायरी अनुबंध में बीते सत्र से 325 रुपये यानी 0.64 फीसदी की तेजी के साथ 50,925 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार चल रहा था। वहीं, एमसीएक्स पर चांदी के दिसंबर अनुबंध में बीते सत्र से 974 रुपये यानी 1.55 फीसदी की तेजी के साथ 63,713 रुपये प्रति किलो पर कारोबार चल रहा था।

जेम एंड ज्वेलरी ट्रेड काउंसिल ऑफ इंडिया (जीजेटीसीआई) के प्रेसीडेंट और अहमदाबाद के कारोबारी शांतिभाई पटेल ने भी बताया कि सोने और चांदी में जोरदार लिवाली रही, हालांकि उन्होंने कहा कि चांदी की खरीदारी ज्यादा रही, क्योंकि लोग धनतेरस पर चांदी के आभूषण से ज्यादा कहीं बर्तन खरीदते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स पर सोने के दिसंबर अनुबंध में शुक्रवार को बीते सत्र से 12.95 डॉलर यानी 0.69 फीसदी की तेजी के साथ 1,886.25 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था।

कॉमेक्स पर चांदी के दिसंबर अनुबंध में बीते सत्र से 1.90 फीसदी की तेजी के साथ 24.76 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था।

केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि सोने में लोगों ने अगस्त में एमसीएक्स पर 56,191 रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव देखा है और इस समय 50,000-51,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव चल रहा है। वहीं, चांदी का भाव सात अगस्त को रिकॉर्ड 77,949 रुपये प्रति किलो तक उछला था, जबकि इस समय 63,000-64,000 रुपये प्रति किलो का भाव है। इसलिए गिरावट पर लिवाली बढ़ी है। उन्होंने कहा कि डॉलर में कमजोरी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने को सपोर्ट मिल रहा है।

पीएमजे/एएनएम

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।