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खुदरा महंगाई दर पहुंची 14 महीनों के उच्चतम स्तर पर, बढ़कर हुई 3.99%

खुदरा महंगाई दर पहुंची 14 महीनों के उच्चतम स्तर पर, बढ़कर हुई 3.99%

हाईलाइट

  • खुदरा महंगाई दर के सितंबर माह के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए
  • फूड आइटम्स महंगे होने के चलते खुदरा महंगाई दर 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है
  • खदरा महंगाई दर सितंबर 2019 में बढ़कर 3.99% हो गई है

डिजिटल डेस्क, मुंबई। खुदरा महंगाई दर के सितंबर माह के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए। फूड आइटम्स महंगे होने के चलते खुदरा महंगाई दर 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर सितंबर 2019 में बढ़कर 3.99% हो गई। अगस्त महीने में यह 3.28 प्रतिशत थी। सेंट्रल स्टेटस्टिक्स ऑफिस ने ये आंकड़े जारी किए हैं। हालांकि खुदरा महंगाई दर अभी भी आरबीआई के 4% के लक्ष्य के दायरे में है।

सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर फूड प्राइज इंडेक्स अगस्त के 2.99% के मुकाबले बढ़कर 5.11% पर पहुंच गया है। सब्जियों की महंगाई दर 6.90% से बढ़कर 15.40% हो गई। दालों की महंगाई दर 6.94% के मुकाबले बढ़कर 8.40% हो गई। अनाज की महंगाई दर अगस्त के 1.3% के मुकाबले बढ़कर 1.66% पर पहुंच गई है। हाउसिंग इंफ्लेशन अगस्त में 4.84% था जो सितंबर में बढ़कर 4.75% पर पहुंच गया।

ईंधन और बिजली की महंगाई दर अगस्त के -1.7% के मुकाबले घटकर -2.18% हो गई।  अगस्त के 1.23% की तुलना में सितंबर में कपड़ों और जूतों की महंगाई दर घटकर 0.96% हो गई।

इस बीच, मुख्य रूप से ईंधन और मैन्युफैक्चर्ड गुड्स की गिरती कीमतों के कारण थोक मुद्रास्फीति सितंबर में 0.33 प्रतिशत के तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गई।  यह अगस्त में 1.08 फीसदी थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर भी महंगाई में गिरावट का रुझान दिखा, क्योंकि 2018 की इसी अवधि के दौरान महंगाई 5.22 फीसदी तक बढ़ गई थी।

क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI यानि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। यह रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी की करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।