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इकोनॉमी को डबल झटका, रिटेल इन्फ्लेशन में बढ़ोतरी, IIP में गिरावट

इकोनॉमी को डबल झटका, रिटेल इन्फ्लेशन में बढ़ोतरी, IIP में गिरावट

हाईलाइट

  • खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के 4.06% से बढ़कर 5.03% हो गई
  • कंज्यूमर फूड प्राइज इंफ्लेशन फरवरी में बढ़कर 3.87% पर पहुंच गया
  • इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 1.6 प्रतिशत का कॉन्ट्रेक्शन आया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फूड प्रोडक्ट की बढ़ी कीमतों के कारण फरवरी में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के  4.06% से बढ़कर 5.03% हो गई है। कंज्यूमर फूड प्राइज इंफ्लेशन जनवरी के 1.89% के मुकाबले फरवरी में बढ़कर 3.87% पर पहुंच गया। अर्थव्यवस्था के एक अन्य प्रमुख बैरोमीटर, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन निगेटिव जोन में है। जनवरी में इसमें 1.6 प्रतिशत का कॉन्ट्रेक्शन आया है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टरों का लोअर आउटपुट है। 

इनमें हुई बढ़ोतरी और इनमें आई गिरावट 
सेंट्रल स्टेटस्टिक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर फूड प्राइज इंफ्लेशन जनवरी के 1.89% के मुकाबले फरवरी में बढ़कर 3.87% पर पहुंच गया। सब्जियों की महंगाई दर भी -15.84% से बढ़कर -6.27% हो गई है। दालों की महंगाई दर 13.39% के मुकाबले घटकर 12.54% हो गई। वहीं, महीने दर महीने के आधार पर फ्यूल एंड लाइट इन्फ्लेशन जनवरी के 3.87% के मुकाबले घटकर 3.53% हो गई है। हाउसिंग इंफ्लेशन 3.25 थी जो फरवरी में घटकर 3.23% पर पहुंच गई है। कपड़ों और जूतों की महंगाई दर 3.82% के मुकाबले बढ़कर 4.21% हो गई।

क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI यानि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। यह रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी की करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य और पेय पदार्थ से जुड़ी चीजों और एजुकेशन, कम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, रीक्रिएशन, अपैरल, हाउसिंग और मेडिकल केयर जैसी सेवाओं की कीमतों में आ रहे बदलावों को शामिल किया जाता है।

महीने-दर-महीने आधार पर आईआईपी का सेक्टर वाइज ब्रेकअप
-माइनिंग सेक्टर में फरवरी में कॉन्ट्रेक्शन 4.8% से घटकर 3.7% हो गया।
-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 1.6% ग्रोथ के मुकाबले 2% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-इलेक्ट्रिस्टी सेक्टर में 5.1% ग्रोथ के मुकाबले 5.5% की ग्रोथ रही।
-प्राइमरी गुड्स में 0.3% कॉन्ट्रेक्शन के मुकाबले 0.2% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-कैपिटल गुड्स में 0.6% ग्रोथ के मुकाबले 9.6% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-इंटरमीडिएट गुड्स में 0.4% की ग्रोथ के मुकाबले 0.5% ग्रोथ रही।
-इंफ्रास्ट्रक्चर गुड्स में 0.9% ग्रोथ के मुकाबले 0.3% की ग्रोथ रही।
-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 4.9% ग्रोथ के मुकाबले 0.2% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-कंज्यूमर नॉन ड्यूरेबल्स में 2% ग्रोथ के मुकाबले 6.8% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।