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लेमन ग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रही झारखंड की ग्रामीण महिलाएं

June 17th, 2020 13:00 IST
 लेमन ग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रही झारखंड की ग्रामीण महिलाएं

हाईलाइट

  • लेमन ग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रही झारखंड की ग्रामीण महिलाएं

रांची, 17 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल को वोकल नारे को झारखंड की महिलाएं साकार करती नजर आ रही है। पाकुड़ जिले की दो महिलाएं लेमन ग्रास की खेती कर ना केवल अपने सपनो को साकार करने में जुटी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने की राह दिखा रही हैं।

पाकुड के पकुड़िया प्रखंड की सोनोती मुर्मू एवं लुखी हेम्ब्रम कल तक अपनी रोजी रोटी के लिए चिंतित रहती थी लेकिन आज ये लेमन ग्रास की खेती से करीब ढाई लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं।

जोहार परियोजना संपोषित, शिकारपुर, आमकोना आजीविका उत्पादक समूह से जुड़ी सोनोती एवं लुखी ने जून 2019 में लेमन ग्रास की खेती करने की ठानी और इसकी शुरूआत की। खेती की शुरूआत में कई लोगों ने इनको पैसे डूबने को लेकर डराया भी लेकिन उत्पादक समूह की इन महिलाओं ने हार नहीं मानी। आज इनके लहलहाते खेत और उनके चेहरे की मुस्कान शून्य से शिखर की कहानी बयां कर रही है।

लेमन ग्रास की खेती की जानकारी प्राप्त कर सोनोती एवं लुखी अपने खाली पड़ी जमीन में लेमन ग्रास की खेती की। जोहार परियोजना के द्वारा लेमन ग्रास की खेती हेतु तकनीकी सहयोग एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराई गई। सखी मंडल से 50,000 का ऋण लेकर दोनों महिलाओं ने अपने 2 एकड़ जमीन में 40,000 लेमन ग्रास स्लिप लगाया।

सोनोती और लुखी पिछले एक साल में 3 बार लेमन ग्रास स्लिप की कटाई की है। इन महिला किसानों ने कुल 3 लाख 40 हजार लेमन ग्रास स्लिप की कटाई एवं 75 पैसे प्रति स्लिप की दर से बिक्री कर ढाई लाख की आमदनी की है।

अपने चेहरे पर सफलता की चमक समेटे सोनोती मुर्मू आईएएनएस को बताती हैं, हमने तो कभी सोचा भी नहीं था की इस टांड़ (उपरी भूमि) में कुछ फसल लगा पाएंगे, लेकिन जोहार परियोजना से प्रशिक्षण लेकर हमने लेमन ग्रास की खेती कर अच्छा मुनाफा कमाया है।

लुखी विश्वास से भरे शब्दों में कहती हैं कि उत्पादक समूह से जुड़कर हमलोगों ने जाना की कैसे सामूहिक खेती और सामूहिक बिक्री कर मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।

लुखी आगे बताती है, उत्पादक समूह में चर्चा एवं प्रशिक्षण के बाद ही हमने लेमनग्रास की खेती करने की सोची और आज वो फैसला सही एवं सफल होता दिख रहा है, इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि एक बार फसल लगाने के बाद 5 साल तक दुबारा लगाने की जरुरत नहीं है और हर साल कमाई होगी।

ग्रामीण विकास विभाग के तहत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी राज्य में जोहार परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है। जिसके जरिए ग्रामीण महिलाओं को उत्पादक समूह के जरिए उन्नत खेती से जोड़ा जा रहा है।

जोहार परियोजना के परियोजना निदेशक बिपिन बिहारी बताते है कि जोहार से झारखंड के गांव की तस्वीर बदल रही है, लोग पारंपरिक खेती से हटकर वनोपज का मूल्यवर्धन कर भी अपनी आय में वृद्घि कर रहें है। जमीन होते हुए भी जो किसान खेती करने मे असक्षम थे, वह अब तकनीकी प्रशिक्षण एवं सहयोग लेकर लेमन ग्रास, सहजन (मोरिंगा), तुलसी जैसे पौधों की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

जोहार परियाजना के तहत उत्पादक कंपनी के जरिए आने वाले समय में तेल निकालने की मशीन लगने के की योजना है, जिससे उपज का मूल्यवर्धन कर ज्यादा मुनाफा कमा सके, साथ ही दूसरे किसानों की भी तकनीकी मदद कर सके।

परियोजना निदेशक कहते हैं, जोहार परियोजना के तहत अबतक राज्य के 11 जिलों के 21 प्रखण्ड में 3100 से ज्यादा किसानों को लेमन ग्रास की खेती से जोड़ा गया है। किसानों को तकनीकी सहयोग और सुझाव देने के लिए 542 वनोपज मित्र को प्रशिक्षित किया गया है जो इन किसानों को लगातार प्रशिक्षण एवं अन्य सलाह ग्राम स्तर पर देते है।

लेमन ग्रास अथवा नींबू घास का महत्व उसकी सुगंधित पत्तियों के कारण है। पत्तियों से वाष्प आसवन के द्वारा तेल प्राप्त होता है। जिसका उपयोग कस्मेटिक्स, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन, कीटनाशक एवं दवाओं में होता है। एंटीअक्सिडेंट के रुप में लेमन ग्रास का काफी महत्व है। लेमन ग्रास की खेती कम उपजाऊ जमीन एवं टांड मे भी आसानी से की जा सकती है तथा एक बार पौधा लगाने के बाद 5 वर्षो तक प्रति वर्ष 4 से 5 बार इसकी पत्तियों (स्लिप) की कटाई एवं बिक्री कर मुनाफा कमाया जा सकता है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।