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Real Estate: समय पर फ्लैट नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DLF सदर्न होम्स को देना होगा 6% सालाना ब्याज

Real Estate: समय पर फ्लैट नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DLF सदर्न होम्स को देना होगा 6% सालाना ब्याज

हाईलाइट

  • समय पर फ्लैट नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
  • बिल्डर को देना होगा 6% सालाना ब्याज

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। समय से ग्राहक को पजेशन नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ सदर्न होम्स को हर्जाना देने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने DLF को आदेश दिया है कि वह 6 फीसदी सालाना ब्याज बॉयर्स को दे। DLF को यह पेमेंट एक महीने में करना होगा। इससे ज्यादा देरी होने पर पेमेंट करने तक 9 फीसदी इंटरेस्ट के साथ पेमेंट करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के फैसले को अलग रखा, जिसने 2 जुलाई, 2019 को 339 फ्लैट खरीदारों की शिकायतों को खारिज करते हुए कहा था कि वे उस मुआवजे के हकदार नहीं हैं, जो अग्रीमेंट में शामिल नहीं है।

2009 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
खरीदारों ने बेंगलुरु में डीएलएफ सदर्न होम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ आवासीय फ्लैट बुक किए थे, जिसे अब बेगुर ओएमआर होम्स प्राइवेट के नाम से जाना जाता है। इस प्रोजेक्ट को 27.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा था और इसमें 1980 यूनिट शामिल थीं। प्रोजेक्ट के तहत उन्नीस टावर बनाए जाने थे, जिनमें से प्रत्येक में एक अठारह मंजिलें थीं। 2009 में इस परियोजना को शुरू किया गया था और इसे 36 महीने में बन जाना था। लेकिन तबसे कई बार डेट बढ़ चुकी है। खरीदारों ने फ्लैटों के कब्जे को सौंपने में देरी के कारण NCDRC का रुख किया था और मुआवजे की मांग की थी। 

NCDRC ने माना था कि खरीदारों को फ्लैटों को सौंपने में देरी की गई। लेकिन अग्रीमेंट में हर महीने देरी के लिए सुपर एरिया के 5 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से मुआवजा प्रदान करने की बात कही गई थी। इस वजह से NCDRC  ने यह कहा था कि अग्रीमेंट की शर्त के अनुसार फ्लैट खरीदने वाले इसके अतिरिक्त कोई राशि लेने के हकदार नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि फ्लैट मालिक डेवलपर्स के साथ अपने अग्रीमेंट में निर्धारित राशि से अधिक की क्षतिपूर्ति के हकदार हैं। NCDRC के आदेश के खिलाफ डब्ल्यूजी सीडीआर आरिफुर रहमान खान और अन्य ने उनकी उपभोक्ता शिकायतों को खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर की थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।