comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सेंसेक्स 414 अंक लुढ़का, निफ्टी 10000 के उपर बंद (लीड-1)

June 09th, 2020 20:00 IST
 सेंसेक्स 414 अंक लुढ़का, निफ्टी 10000 के उपर बंद (लीड-1)

हाईलाइट

  • सेंसेक्स 414 अंक लुढ़का, निफ्टी 10000 के उपर बंद (लीड-1)

मुंबई, 9 जून (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह से जारी तेजी पर मंगलवार को ब्रेक लग गया। विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर किए गए चिंताजनक आकलन को लेकर बाजार में गिरावट आई। सेंसेक्स पिछले सत्र से 413.89 अंकों यानी 1.20 फीसदी की गिरावट के साथ 33,956.69 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 120.80 अंक यानी 1.19 फीसदी फिसलकर 10,046.65 पर आकर रूका।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 150.21 अंकों की बढ़त के साथ 34520.79 पर खुला और 34811.29 तक उछला, लेकिन बाद में बिकवाली के दबाव में लुढ़ककर 33881.19 पर आ गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी पिछले सत्र के मुकाबले 13.70 अंकों की तेजी के साथ 10181.15 पर खुला और 10291.15 तक चढ़ा लेकिन बाद में फिसलकर 10121.45 पर आ गया।

बीएसई मिडकैप सूचकांक पिछले सत्र से 26.11 अंकों यानी 0.21 फीसदी की गिरावट के साथ 12557.50 पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक पिछले सत्र से 119.28 अंकों यानी एक फीसदी की गिरावट के साथ 11846.05 पर ठहरा।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से नौ में तेजी रही, जबकि 21 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स के सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच शेयरों में इंडसइंड बैंक (2.71 फीसदी), सनफार्मा (2.37 फीसदी), एमएंडएम (1.68 फीसदी), एचडीएफसी (0.55 फीसदी) और आईटीसी (0.43 फीसदी) शामिल रहे।

सेंसेक्स के सबसे ज्यादा गिरावट वाले पांच शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक (3.15 फीसदी), भारती एयरटेल (2.93 फीसदी), एचडीएफसी बैंक (2.81 फीसदी), बजाज फाइनेंस (2.55 फीसदी) और कोटक बैंक (2.54 फीसदी) शामिल रहे।

बीएसई के 19 सेक्टरों में से 16 में गिरावट जबकि तीन सेक्टरों के सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई।

सबसे ज्यादा गिरावट वाले पांच सेक्टरों में टेलीकॉम (3.06 फीसदी), बैंक इंडेक्स (2.30 फीसदी), एनर्जी (1.97 फीसदी), तेल व गैस (1.96 फीसदी) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.93 फीसदी) शामिल रहे।

वहीं, हेल्थकेयर में (1.16 फीसदी), रियल्टी (0.30 फीसदी) और एफएमसीजी में (0.01 फीसदी) की बढ़त रही।

-- आईएएनएस

कमेंट करें
gak6A
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।