Bhandara News: थाली पर महंगाई की मार, सप्ताहभर में केसर चावल 80 रुपए किलो तक पहुंचा

थाली पर महंगाई की मार, सप्ताहभर में केसर चावल 80 रुपए किलो तक पहुंचा
  • तुअर दाल 160 और चना दाल 100 रुपए के पार
  • चावल निर्यात और कम उत्पादन से भाव और बढ़ने की आशंका

Bhandara News जिले में अनाज और दालों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बीते एक सप्ताह में चावल से लेकर दालों तक के भाव में तेजी आने से रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। सबसे ज्यादा मांग वाले पुराने केसर चावल की कीमत 50 रुपए से बढ़कर 75 से 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं, वाडा कोलम और सुगंधित चिन्नौर चावल के भाव 70 से बढ़कर 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। तुअर दाल 160 रुपए और चना दाल 100 रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है। व्यापारियों के मुताबिक, अनाज की कीमतों में गिरावट की संभावना बेहद कम है। चावल के निर्यात से भाव में और तेजी आने की आशंका है।

टुकड़ा चावल भी 60 रुपए किलो : पिछले एक सप्ताह में अनाज की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से ग्राहकों की परेशानी बढ़ गई है। 35 से 40 रुपए प्रति किलो मिलने वाला टुकड़ा चावल अब 60 रुपए तक पहुंच गया है। पुराने चावल की कीमत पहले से अधिक होती है। जिले में केसर और एचएमटी जैसे चावल की सर्वाधिक मांग है। सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवार भी इन्हीं किस्मों को खरीदना पसंद करते हैं। लेकिन इनकी कीमत 70 से 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने से अब कई ग्राहक टुकड़ा चावल खरीदने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, भोजन में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली तुअर दाल के भाव में भी बड़ा उछाल आया है।

तुअर दाल 160, चना दाल 100 रुपए के पार : एक सप्ताह पहले तक तुअर दाल 90 से 130 रुपए प्रति किलो के भाव पर मिल रही थी, लेकिन अब इसकी कीमत 130 से 160 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी तरह चना दाल के भाव 70 रुपए से बढ़कर 100 रुपए प्रति किलो के पार चले गए हैं। अनाज और दालों की कीमतों में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर गरीब और सामान्य वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। अचानक महंगाई बढ़ने से कई परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है। ऐसे में ग्राहक कीमतों को लेकर व्यापारियों से सवाल कर रहे हैं।

कम बारिश और निर्यात से बढ़े भाव : कीमतों में तेजी के पीछे इस बार अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। कम बारिश के कारण फसलों का उत्पादन घटने की आशंका है। वहीं, पानी की कमी के चलते किसान रबी और ग्रीष्मकालीन फसलें लेने से भी बच रहे हैं। इससे बाजार में अनाज की आवक कम होने की संभावना है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से करीब एक महीने पहले चावल का निर्यात शुरू किए जाने से भी घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने की बात कही जा रही है।

नए बारीक धान को 4,500 रुपए प्रति क्विंटल मिलने की उम्मीद : खरीफ सीजन का बारीक धान कुछ सप्ताह में बाजार में आने की उम्मीद है। इस बार नए बारीक धान को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भाव मिलने की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर 2,200 से 2,500 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाला नया धान इस बार 4,500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में नए चावल की कीमतें भी 75 से 80 रुपए प्रति किलो के आसपास रहने की संभावना जताई जा रही है। यदि कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रही, तो आम उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में भी महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद कम है।


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