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डरबन हुआ भगवामय: अफ्रीका में लहराया भगवा, स्वामी अभेदानंद के नेतृत्व में ऐतिहासिक आध्यात्मिक जागरण

भारत के बाहर आयोजित सनातन धर्म के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक में, 17,000 से अधिक श्रद्धालु दक्षिण अफ्रीका के डरबन स्थित चैट्सवर्थ स्टेडियम में आयोजित ऐतिहासिक "मैन टू हनुमान" कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आयोजन चिन्मय मिशन दक्षिण अफ्रीका द्वारा वैश्विक चिन्मय अमृत महोत्सव के अंतर्गत किया गया, जो चिन्मय आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
इस आयोजन को विशेष महत्व तब मिला जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय मिशन दक्षिण अफ्रीका को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए एक विशेष संदेश भेजा। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ को सद्भाव, भक्ति और करुणा का प्रतीक बताया तथा दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को सशक्त बनाने में भारतीय प्रवासी समुदाय के योगदान की सराहना की।
हजारों श्रद्धालु क्वाज़ुलु-नटाल तथा आसपास के प्रांतों से इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। 80 से अधिक बसों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आयोजन स्थल तक लाया गया। पद्मश्री अनुप जलोटा और गायिका-अभिनेत्री अनुजा साहई के नेतृत्व में पूरे स्टेडियम में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ गूंज उठा, जिससे वातावरण भक्ति और एकता से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वामी अभेदानंद सरस्वती का प्रेरणादायी संबोधन रहा, जो दक्षिण अफ्रीका में अपनी दो दशकों की आध्यात्मिक सेवा पूर्ण कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े रहने, सेवा, सद्भाव और सामाजिक एकता के मार्ग पर चलने तथा अपने धर्म का गर्व के साथ उत्सव मनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान की तस्वीर और "आई एम ए प्राउड हिंदू" अंकित भगवा ध्वज एक साथ लहराए। यह दृश्य आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत प्रतीक बन गया।
अपने संबोधन में अनुप जलोटा ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा की सराहना करते हुए स्वामी अभेदानंद के उस योगदान को रेखांकित किया, जिसके माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ा है। उन्होंने स्वामीजी को अफ्रीका में भारत से आए सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले हिंदू संन्यासी बताते हुए दक्षिण अफ्रीका में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नवजागरण का श्रेय भी उन्हें दिया।
इस कार्यक्रम में क्वाज़ुलु-नटाल के प्रीमियर थामी न्तुली भी उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लिया और चिन्मय मिशन वर्ल्डवाइड को 75 वर्षों की सेवा पूर्ण करने पर बधाई दी।
करीब 200 स्वयंसेवकों ने इस विशाल आयोजन की संपूर्ण व्यवस्थाओं का संचालन किया। स्वयंसेवकों ने 20,000 से अधिक महाप्रसाद भोजन पैकेट तैयार कर वितरित किए तथा भगवान हनुमान को अर्पित किए जाने वाले 27,000 पारंपरिक रोट (Rhots) भी प्रसाद स्वरूप वितरित किए।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि आस्था, सेवा, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता का भव्य उत्सव बनकर उभरा। इसने अफ्रीकी महाद्वीप में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और सामुदायिक सद्भाव को सुदृढ़ बनाने में चिन्मय मिशन दक्षिण अफ्रीका की बढ़ती भूमिका को भी पुनः स्थापित किया।
Created On :   9 July 2026 6:28 PM IST












