Bhopal News: नही रहे राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पूर्व संचालक और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत

नही रहे राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पूर्व संचालक और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश चंद्र पंत
पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पूर्व संचालक और पद्मश्री से सम्मानित और हिंदी भवन भोपाल के पूर्व मंत्री-संचालक पं. कैलाश चन्द्र पंत का शुक्रवार को भोपाल में उपचार के दौरान निधन हो गया।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पूर्व संचालक और पद्मश्री से सम्मानित और हिंदी भवन भोपाल के पूर्व मंत्री-संचालक पं. कैलाश चन्द्र पंत का शुक्रवार को भोपाल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका व्यक्तित्व साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र में लोक संग्रह के में पहचाना जाता है।

पंत अपने सुदर्शन व्यक्तित्व, गरिमामय व्यवहार और आत्मीय स्वभाव के कारण समाज में सम्मानित थे। वर्ष मार्च में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2025 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को मप्र के महू में हुआ था। उन्होंने साहित्याचार्य, साहित्य रत्न एवं हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की थी। बचपन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। उन्होंने महू में स्वाध्याय विद्यापीठ की स्थापना की। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से सक्रिय रूप से जुड़े। क्रिश्चियन कॉलेज, इन्दौर छात्र के रूप में साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। वे सोशलिस्ट कांग्रेस मेन, दिल्ली, नवभारत भोपाल, नवप्रभात भोपाल में सह-संपादक रहे। मासिक शिक्षा प्रदीप के संपादक और इन्दौर समाचार के संवाददाता भी रहे।

उन्होंने साप्ताहिक जनधर्म का प्रकाशन, आद्य शंकराचार्य स्मृति अंक, मंत्र-यंत्र-तंत्र विशेषांक, मालव विशेषांक एवं छत्तीसगढ़ विशेषांक प्रकाशित किए। उन्होंने सारस्वत सम्मान की स्थापना की, जिसके अंतर्गत भवानी प्रसाद मिश्र, नरेश मेहता, शिवमंगल सिंह 'सुमन' सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वे हिन्दी साहित्य समिति, इन्दौर के उपसभापति तथा शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल पत्रकारिता ट्रस्ट, भोपाल के सचिव भी रहे। 1988 में उन्हें राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का मंत्री (संचालक) चुना गया।

उनकी प्रमुख कृतियों में कौन किसका आदमी, धुंध के आर-पार, शब्द का विचार पक्ष, शैलेष मटियानी: सृजन यात्रा, संस्कार, संस्कृति और समाज तथा संकल्प की प्रतीक्षा में शामिल हैं। उन्होंने फिलीपींस, नेपाल, इज़राइल, इंडोनेशिया, ट्रिनिडाड व टोबैगो, लंदन, ह्यूस्टन, सूरीनाम और जोहान्सबर्ग सहित अनेक देशों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्राएं कीं।

पंत अपने परिवार में तीन बेटियां, प्रीति-देवेश (नई दिल्ली), निवेदिता-अनुराग, अदिति-निमिष छोड़ गए। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को भोपाल के भदभदा विश्राम घाट में किया जाएगा।

Created On :   1 Aug 2026 2:11 AM IST

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