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MP News: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना को लेकर भाजपा सरकार पर लगाए बड़े आरोप

-डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा में अनियमितता को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। सिंघार ने कहा कि 44 हजार करोड़ की इस परियोजना में पहले चरण से ही ग्राम सभा प्रक्रिया, मुआवजा वितरण, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताएं हैं।
केंद्र सरकार ने मप्र की सरकार से जवाब-तलब किया है। मझगांव–रुंझ क्षेत्र में मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि एनसीसी लिमिटेड ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा को 60 करोड़ का चंदा दिया।
यही कंपनी केन–बेतवा परियोजना के दौधन बांध के लगभग 3400 करोड़ के निर्माण कार्य में शामिल है। सिंघार ने सवाल किया कि क्या 60 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड के बदले 3400 करोड़ का ठेका दिया गया।
प्रभावित ग्रामीणों ने कहा चार वर्षों से विधिसम्मत ग्राम सभा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। प्रभावित परिवारों को सोशल इम्पैक्ट एसेसमेंट की जानकारी नहीं दी गई। रतिया, करी, खटवानी, पालकोहा, नय्यापुर, खजुरी एवं सुकवाहा ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द समान भाषा दर्ज मिली।अधिकांश ग्राम सभाओं की बैठक 17 और 18 फरवरी 2022 को सुबह 11:30 बजे दर्ज हैं, जबकि अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय पर बैठक होना संदेह उत्पन्न करता है। आदिवासियों की ग्राम सभा को केवल कागज़ी औपचारिकता बनाकर रख दिया गया।
आदिवासियों की जमीन मुस्लिम परिवारों को दी
सिंघार ने कहा कि खरिहानी ग्राम पंचायत के 17 फरवरी 2022 के कार्यवाही रजिस्टर में रतीराम मेहरबार के हस्ताक्षर दर्ज हैं। जबकि उस समय निर्वाचित सरपंच उमा मिश्रा थीं और रतीराम मेहरबान ने लगभग छह माह बाद पद लिया था। ग्रामीणों के अनुसार खरिहानी गांव के मकानों के लिए लगभग 11 करोड़ का मुआवजा स्वीकृत हुआ, जबकि दस्तावेजों के अनुसार लगभग 8 करोड़ ऐसे लोगों को दिए गए जिनका गांव से संबंध नहीं था। जो वर्ष 1980–1990 में ही गांव छोड़ चुके थे। आंदोलनकारियों ने दस्तावेजों के आधार पर 500 से अधिक कथित फर्जी मुआवजा वितरण के मामलों की पहचान की है।
खरिहानी गांव में एक ऐसे मुस्लिम परिवार के नाम भी मुआवजा स्वीकृत किया गया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि गांव में कभी ऐसा परिवार निवास नहीं करता था। सुकवाहा गांव की वृद्ध आदिवासी महिला सुमता रानी ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना उनकी भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी गई और उसी के नाम मुआवजा भी स्वीकृत हो गया। उनके पास पीढ़ियों पुराने भूमि दस्तावेज़ उपलब्ध हैं, लेकिन मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला।
आंदोलनकारियों के धमकाया गया
आरोप है कि देर रात सिविल ड्रेस में पहुंचे लोगों ने आंदोलनकारियों को धमकाया। पैसे लेकर हिरासत से छोड़े जाने की बात सामने आई है। कई बार लाठीचार्ज हुआ, जिसमें बुजुर्ग महिलाएं भी घायल हुईं। 250 से अधिक आदिवासी ग्रामीणों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। परियोजना को 3 अक्टूबर 2023 को स्टेज-2 वन स्वीकृति मिली थी, जिसकी शर्तों के अनुसार 3 अक्टूबर 2024 तक पुनर्वास एवं भूमि हस्तांतरण पूरा होना था।
इसके बावजूद वर्ष 2025 की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जबकि पुनर्वास, मुआवजा और पात्रता से जुड़े अनेक मामले लंबित थे। पन्ना टाइगर रिजर्व के 6–7 गांवों में जबरन कब्जा लेकर निर्माण कार्य शुरू करने और कई प्रभावित परिवारों के मकान तोड़े जाने के आरोप हैं।
Created On :   19 July 2026 1:44 AM IST












