मध्य प्रदेश: एनजीटी ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने का दिया निर्देश, राज्य के आंकड़ों के सत्यापन का आदेश

एनजीटी ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने का दिया निर्देश, राज्य के आंकड़ों के सत्यापन का आदेश
  • अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन तथा तरल अपशिष्ट व सीवेज प्रबंधन
  • इस संबंध में राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए

New Delhi News. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने मध्य प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन तथा तरल अपशिष्ट व सीवेज प्रबंधन के संबंध में राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, तथा डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। यह मामला मूल आवेदन संख्या 606/2018 में विचाराधीन है, जिसमें नगर निकायों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुपालन तथा अन्य पर्यावरणीय मुद्दों पर विचार किया जा रहा है। अधिकरण ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा दाखिल शपथ पत्र का परीक्षण किया। अधिकरण ने पाया कि राज्य में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति मुख्यतः 413 नगरीय स्थानीय निकायों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है और इन आंकड़ों का पर्याप्त मैदानी सत्यापन नहीं किया गया है। इस पर अधिकरण ने प्रत्येक जिले के जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से आंकड़ों का सत्यापन कराने का निर्देश दिया।

अधिकरण ने यह भी दर्ज किया कि 352 स्थानीय निकायों में 1,315 नालों के माध्यम से लगभग 637 एमएलडी सीवेज और सीवेजयुक्त जल विभिन्न जल निकायों में छोड़ा जा रहा है, जिनमें नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल जैसी नदियां भी शामिल हैं। अधिकरण ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अगली अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले को मध्य प्रदेश से संबंधित रिपोर्ट पर विचार के लिए 24 फरवरी 2027 को सूचीबद्ध किया गया है।

Created On :   25 Aug 2026 7:39 PM IST

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