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सवाल-जवाब: शिवराज ने कहा - फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय, खाद का है पर्याप्त स्टॉक

New Delhi News. अजीत कुमार। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अमेरिका-ईरान युद्ध के बावजूद इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि भारत में खाद की कमी नहीं होगी। कृषि मंत्री ने मध्यप्रदेश के रायसेन में संपन्न उन्नत कृषि महोत्सव के बाद दैनिक भास्कर के साथ विशेष बातचीत में फसल विविधीकरण, उर्वरक की समस्या, पराली प्रबंधन सहित अन्य मसलों पर बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत का प्रमुख अंश:
प्रश्न : अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से देश में उर्वरक की आपूर्ति पर कितना असर पड़ा है?
उत्तर : देश में अभी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक है। हालांकि युद्ध की वजह से परिस्थितियां असामान्य और प्रभाव डालने वाली है। हम वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी देख रहे हैं। फिलहाल खाद का पर्याप्त स्टॉक है। मुझे लगता है कि आने वाले खरीफ सीजन में खाद की कोई बड़ी दिक्कत नहीं आने वाली है। इस परिस्थिति से देश को बाहर निकालने में हम सक्षम हैं।
प्रश्न : दाल और तिलहनों के आयात के असर का आकलन किया गया है?
उत्तर : घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए देश में एक आयात नीति है। हालांकि जब भी किसी अनाज की कीमत गिरती है, तो हम पीएम-आशा योजना के जरिए हस्तक्षेप करते हैं। यह सुनिश्चित करते हैं कि किसानों को मजबूरीवश अपना अनाज कम कीमत में नहीं बेचना पड़े।
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प्रश्न : अगले कुछ सालों में कृषि का ग्रोथ कैसा रहने का अनुमान है?
उत्तर : देखिए, ग्रोथ कई चीजों पर निर्भर करती है। उसमें मानसून सबसे बड़ा कारक है। अगर मानसून की हालत ज्यादा खराब हुई तो फिर चीजें आपके हाथ में नहीं रहती। लेकिन हमारी ग्रोथ इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा है। आज कृषि और उसकी सहयोगी सेवाओं की ग्रोथ लगभग 5.5 प्रतिशत है।
प्रश्न : खराब मौसम के चलते फसलों का नुकसान आम बात है। इस दिशा में सरकार क्या कर रही है?
उत्तर : लगभग 23 राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चल रही है। दूसरे राज्यों को भी इसमें शामिल होने के लिए कहा गया है। फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए सैटेलाइट बेस्ड रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। 2016 से अब तक इस योजना के तहत किसानों को लगभग 2 लाख करोड़ रूपये के क्लेम का भुगतान हो चुका है। हम फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए सभी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे है, ताकि कोई बेईमानी न कर पाए।
प्रश्न : किसानों की आय बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है?
उत्तर : खेती को लाभकारी बनाने के लिए नई तकनीकों, फसल विविधीकरण और एकीकृत खेती पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। हम इस बात पर लगातार जोर दे रहे हैं कि किसान पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी और जैविक खेती को अपनाएं। इससे एक तरफ जहां लागत में कमी आएगी, तो वहीं किसानों को ज्यादा लाभ मिलेगा। उन्नत कृषि महोत्सव में क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, जल उपलब्धता एवं संसाधनों के आधार पर ‘बीज से बाजार तक’ का एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। इससे उपयुक्त फसलों, फलों एवं सब्जयों की पहचान कर उनके उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन की समग्र योजना बनाई जा सकेगी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है, सही फसल लगाना भी जरूरी है।
प्रश्न : पराली जलाने की घटनाएं लगातार देखी जा रही है। पराली प्रबंधन की दिशा में क्या किया जा रहा है?
उत्तर : इसके लिए किसानों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। अब पराली जलाने वालों की संख्या में कमी आई है। उन्नत कृषि महोत्सव में भी इससे संबंधित नुक्कड़ नाटक और सत्र हुए। पराली को जलाने की नहीं, बल्कि उसका प्रबंधन करने की जरूरत है। हैप्पी सीडर से पराली जलाए बिना बुआई हो सकती है। सुपर सीडर पराली को पीसकर मिट्टी में मिला देता है, जिससे वह खाद बन जाती है।
Created On :   16 April 2026 5:00 AM IST












